7 जिलों की 21 सीटें: नेपाल हिंसा का बिहार चुनाव पर असर

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से बिहार के सात सीमावर्ती जिलों में व्यापार ठप हो गया है, जिससे स्थानीय व्यापारी और परिवार आर्थिक संकट झेल रहे हैं, हालांकि इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर नहीं माना जा रहा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नेपाल में चल रही राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत के बिहार राज्य के सात सीमावर्ती जिलों पर पड़ा है. नेपाल में अराजक हालात और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते सीमा पार आवाजाही रुक गई है, जिससे इन इलाकों में कारोबार ठप पड़ गया है और स्थानीय लोग भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.

सात सीमावर्ती जिले

बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिले नेपाल की सीमा से सटे हुए हैं. इन जिलों की कुल 21 विधानसभा सीटें हैं —

1. पश्चिम चंपारण: वाल्मीकिनगर, रामनगर, सिकटा

2. पूर्वी चंपारण: रक्सौल, नरकटिया, ढाका

3. सीतामढ़ी: रीगा, बथनाहा, परिहार, सुरसंड

4. मधुबनी: हरलाखी, खजौली, बाबू बरही, लौकहा

5. सुपौल: निर्मली, छातापुर

6. अररिया: नरपतगंज, फारबिसगंज, सिकटी

7. किशनगंज: बहादुरगंज, ठाकुरगंज

पिछले विधानसभा चुनाव में इन 21 सीटों में से 11 पर भाजपा, 5 पर जदयू, 3 पर राजद, 1 पर भाकपा-माले और 1 पर एआईएमआईएम ने जीत दर्ज की थी. भाजपा ने यहां कोई सीट नहीं हारी थी, जिससे यह इलाका राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जाता है.

रक्सौल का बाजार ठप

पूर्वी चंपारण जिले का रक्सौल शहर नेपाल सीमा से सटा एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है. यहां आमतौर पर रोज हजारों नेपाली नागरिक कपड़े, किराना और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए आते हैं. लेकिन नेपाल में हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण सीमा पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिससे नेपाली ग्राहकों का आना लगभग बंद हो गया है.

रक्सौल में कपड़ों की दुकान चलाने वाले अशोक श्रीवास्तव बताते हैं कि पहले रोजाना करीब 40,000 रुपये का कारोबार होता था, लेकिन अब पांच दिनों से दुकान में मुश्किल से 1000 रुपये की बिक्री हो रही है. उनका कहना है कि दुर्गा पूजा के समय करोड़ों रुपये की बिक्री होती थी, जो अब ठप हो गई है.

पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ा असर

सीमा पार व्यापार ही नहीं, पारिवारिक रिश्ते भी प्रभावित हुए हैं. मोतिहारी के अनिल सिंह का भाई नेपाल में रहता है. वे अक्सर नेपाल आते-जाते थे, लेकिन अब परिवार ने निर्णय लिया है कि वे अपने बेटे को वापस बुला लेंगे. उनका कहना है कि अगर सरकार स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराए, तो लोग सुरक्षित रह सकेंगे.

क्या इसका असर चुनावों पर होगा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि नेपाल की घटनाओं का असर बिहार विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं है. व्यापारी अशोक श्रीवास्तव ने कहा, “हम सरकार से मदद जरूर चाहते हैं, लेकिन नाराज नहीं हैं.”

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं

भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा पर नजर रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर व्यापारियों को मदद दी जाएगी. वहीं, राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि सरकार को प्रभावित व्यापारियों और नेपाल से आने वाले लोगों को रोजगार व सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए.

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