30 घंटे का इंतजार, बिना खाने-पीने के यात्रियों हुए बेहाल...मुंबई-पुणे एक्सप्रेस पर कैसे लगा इतना लंबा जाम?

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम गैस टैंकर पलटने से 30 घंटे तक भयंकर जाम लगा. हजारों यात्री बिना पानी, खाने और शौचालय के फंसे रहे. बुधवार रात टैंकर हटने के बाद ट्रैफिक बहना शुरू हुआ. मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

मुंबईः मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इतिहास की सबसे लंबी ट्रैफिक जाम की घटना बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही. मंगलवार शाम को आदोशी सुरंग के पास एक गैस टैंकर पलटने से 94.5 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर मुंबई की ओर जाने वाली लेन पूरी तरह बंद हो गई. हजारों यात्रियों को लगभग 30 घंटे तक बिना शौचालय, पीने के पानी और खाने के सामान के फंसे रहना पड़ा. आखिरकार बुधवार रात देर से टैंकर को खाली कर सड़क से हटाया गया और मुंबई की ओर ट्रैफिक बहना शुरू हुआ.

टैंकर पलटने से शुरू हुआ संकट

मंगलवार शाम करीब 5:15 बजे कोच्चि से सूरत जा रहे एक टैंकर (NL01 AG 4250) में उच्च दबाव वाली ज्वलनशील प्रोपाइलीन गैस लदी थी. बोर्घाट सेक्शन के आदोशी गांव के पास ड्राइवर रतन सिंह उदय नारायण सिंह (44) ने तेज रफ्तार और सड़क की स्थिति को नजरअंदाज कर दिया, जिससे टैंकर पलट गया. इससे गैस लीक होने लगा. सुरक्षा के मद्देनजर पूरी मुंबई-बाउंड लेन बंद कर दी गई. पुलिस ने लापरवाही से ड्राइविंग का मामला दर्ज किया. ड्राइवर को दाहिने हाथ में चोट आई और उसे कामोठे के एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया.

30 घंटे का इंतजार 

जाम की लंबाई 10-12 किलोमीटर तक पहुंच गई. खालापुर टोल नाके तक पुणे की ओर भी वाहन लंबी कतार में फंसे रहे. रोजाना औसतन एक लाख वाहन गुजरने वाली इस सड़क पर पूरा यातायात ठप हो गया. यात्रियों को बेसिक सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ा. पुणे के रोहित मोरे अपनी एक और तीन साल की दो छोटी संतानों के साथ रात भर फंसे रहे. उन्होंने बताया, “कार में बच्चे रोते रहे, दूध खत्म हो गया, डायपर की समस्या हो गई. बाहर निकलना भी सुरक्षित नहीं था.”

बुजुर्ग यात्रियों की हालत और खराब थी. नासिक से मुंबई मेडिकल जांच के लिए जा रहे विलास और शालिनी मिंजारे को आखिरकार ताम्हिणी घाट से डायवर्ट किया गया. शालिनी ने कहा, “उम्र के इस पड़ाव पर बिना शौचालय के इतने घंटे बैठना बेहद तकलीफदेह था. सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इमरजेंसी में बेसिक सुविधाएं होनी चाहिए.” कई लोगों ने पानी और खाना बचाकर गुजारा किया. बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन, शरीर दर्द और घबराहट की शिकायतें आईं.

हेलिकॉप्टर से बचाव

पुणे के उद्यमी सुधीर मेहता आठ घंटे फंसने के बाद हेलिकॉप्टर से पुणे पहुंचे. उन्होंने एक्स पर जाम की हवाई तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “एक गैस टैंकर के कारण लाखों लोग 18 घंटे फंसे हैं. एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग पॉइंट पर एग्जिट और हेलीपैड अनिवार्य होने चाहिए. हेलीपैड बनाने में 10 लाख से कम खर्च और एक एकड़ से कम जगह लगती है.” पायलट नितिन वेल्डे ने जरूरतमंदों, खासकर मेडिकल इमरजेंसी के लिए हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराने की पेशकश की.

प्रशासनिक कार्रवाई

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की जांच के आदेश दिए. एमएसआरडीसी को भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए सिफारिशें देने को कहा. हाईवे पुलिस अधीक्षक तानाजी चिखले ने बताया कि टैंकर में 21 टन गैस थी, जिसे दूसरे टैंकर में ट्रांसफर किया गया. गैस कंपनी की टीम ने सुरक्षा की पुष्टि के बाद टैंकर हटाया. उच्च दबाव और वाल्व खराब होने से काम में 21 घंटे लगे. आग लगने से बचाव के लिए फायर ब्रिगेड ने पानी का छिड़काव किया और 500 मीटर का नो-मैन जोन बनाया गया.

एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और बीपीसीएल की विशेष टीम मौके पर पहुंची. यात्रियों को ताम्हिणी घाट, करजत, मलशेज घाट और आले फाटा जैसे वैकल्पिक रास्ते अपनाने की सलाह दी गई, लेकिन ये रास्ते भी जाम से प्रभावित रहे और सुविधाओं का अभाव था.

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