बेंगलुरुः बेंगलुरु में अपने किराए के घर में 34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर शर्मिला डीके की हत्या का मामला सामने आया है. शर्मिला 3 जनवरी को अपने राममूर्ति नगर स्थित सुब्रमण्य लेआउट के अपार्टमेंट में मृत पाई गईं. शुरूआती तौर पर यह आशंका जताई गई थी कि आग लगने के कारण दम घुटने से उनकी मौत हुई.
शव मिलने के बाद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 194(3)(iv) के तहत अप्राकृतिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की और मामले की जांच शुरू की. शुरुआती जांच में पाया गया कि घटना में केवल आग लगना ही नहीं, बल्कि हत्या और सबूत मिटाने के इरादे की संभावना भी थी.
जांच के दौरान वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया गया. पुलिस ने ध्यान केंद्रित किया कि पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले 18 वर्षीय युवक करनाल कुराई की भूमिका हो सकती है. पूछताछ के दौरान, आरोपी ने कथित रूप से अपना जुर्म स्वीकार कर लिया.
पुलिस के अनुसार, करनाल कुराई ने 3 जनवरी की रात करीब 9 बजे खिड़की के रास्ते पीड़िता के घर में घुसने की कोशिश की ताकि वह उससे यौन संबंध स्थापित कर सके. जब शर्मिला ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उनका मुंह और नाक दबाकर उन्हें अर्ध-बेहोश कर दिया. इस संघर्ष में शर्मिला को चोटें लगीं और उनका खून बहने लगा.
घटना के बाद आरोपी ने बेडरूम में पीड़िता के कपड़े और अन्य आपत्तिजनक सामग्री रखकर आग लगा दी, जिससे सबूत नष्ट हो सकें. आरोपी ने मौके से भागते समय पीड़िता का मोबाइल फोन भी चुरा लिया.
इकबालिया बयान और प्राप्त सबूतों के आधार पर करनाल कुराई के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या), 64(2), 66 और 238 (सबूत नष्ट करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है और मामले की आगे की जांच जारी है.
शर्मिला डीके की हत्या ने बेंगलुरु में सुरक्षा और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने मामले में तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों के माध्यम से तत्काल करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.
First Updated : Monday, 12 January 2026