मौनी अमावस्या पर संगम तट पर बवाल, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से किया इनकार
मौनी अमावस्या के पावन स्नान के दौरान प्रयागराज संगम तट पर उस वक्त हालात बिगड़ गए, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर शिष्यों से मारपीट का आरोप लगाते हुए संगम स्नान से इनकार कर दिया. घटना के बाद माघ मेले की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

माघ मेला: प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया. उनके इस फैसले के पीछे प्रशासन और उनके शिष्यों के बीच हुई कथित धक्का-मुक्की और मारपीट को वजह बताया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी के साथ अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते से ही उन्होंने पालकी वापस अखाड़े में लौटाने का निर्णय लिया. इस दौरान संगम तट पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
'मेरे शिष्यों से मारपीट हो रही है, इसलिए स्नान नहीं करूंगा'
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आज तक से बातचीत में कहा,"मेरे शिष्यों से मारपीट हो रही है. अधिकारी मारने का इशारा कर रहे हैं, इसलिए मैं स्नान नहीं करूंगा."उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थिति में संगम स्नान करना उन्हें उचित नहीं लगा.
बताया जाता है कि जैसे ही शंकराचार्य अपनी पालकी के साथ संगम नोज की ओर बढ़े, उसी दौरान यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और पुलिस अधिकारियों के साथ उनके शिष्यों की कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई.
मारपीट और धक्का-मुक्की का वीडियो आया सामने
संगम तट से एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी के साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं. उनके साथ बड़ी संख्या में शिष्य मौजूद थे. वीडियो में दिखता है कि इसी दौरान उनके शिष्यों की पुलिस और अधिकारियों से बहस हो गई, जिसके बाद हालात बिगड़ गए और धक्का-मुक्की शुरू हो गई.
इसी घटना के बाद शंकराचार्य ने स्नान न करने का फैसला लिया और अखाड़े की ओर लौट गए.
भीड़ नियंत्रण के लिए रोका गया
वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि शंकराचार्य के शिष्य एक साथ संगम नोज पर जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि उन्हें टुकड़ों में जाने के निर्देश दिए गए थे. प्रशासन के अनुसार, मौनी अमावस्या पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी.
पुलिस का दावा है कि शिष्यों को रोके जाने पर वे पुलिसकर्मियों से उलझ गए, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई.
संगम की ओर उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. रात 12 बजे के बाद से ही लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान के लिए पहुंचने लगे. संगम नोज और आसपास के घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं.
पुलिसकर्मी सीटी बजाकर श्रद्धालुओं को एक स्थान पर रुकने नहीं दे रहे हैं और स्नान के बाद लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि जाम और भगदड़ जैसी स्थिति न बने.
तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया है. सुरक्षा के मद्देनज़र स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी पीएसी और गोताखोरों को तैनात किया गया है.
इसके अलावा पूरे माघ मेला क्षेत्र में पुलिस, पीएसी, आरएएफ, बीडीएस, यूपी एटीएस के कमांडो और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं.
ड्रोन और CCTV से हो रही निगरानी
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, माघ मेले में चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है. पूरे क्षेत्र की निगरानी CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है. संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं पर भी विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके.


