झांकियों और सैन्य परेड की भव्यता के बीच राष्ट्रपति भवन में आम जनता की एंट्री पर रोक
भारत अपनी 77वीं गणतंत्र दिवस की भव्य तैयारियों में जुटा है, जिसमें कड़ी सुरक्षा और यातायात प्रतिबंधों के साथ झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा. राष्ट्रपति भवन में आम जनता का प्रवेश बंद है. दिल्ली पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की है.

भारत 26 जनवरी को अपनी 77वीं गणतंत्र दिवस की भव्य तैयारियों के साथ तैयार है. इस खास मौके पर नई दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर कड़े कदम उठाए गए हैं, ताकि समारोह बिना किसी विघ्न के संपन्न हो सके. अधिकारियों ने प्रमुख स्थानों पर यातायात में बदलाव, वैकल्पिक मार्गों और खास झांकियों की व्यवस्था की है, जो कार्यक्रम की भव्यता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
राष्ट्रपति भवन का सर्किट-1 रहेगा बंद
राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 जनवरी को एक अहम घोषणा की कि राष्ट्रपति भवन के सर्किट-1 में आम नागरिकों का प्रवेश 21 से 29 जनवरी तक अस्थायी रूप से बंद रहेगा. यह बंद 29 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोह की तैयारी के लिए किया गया है. इस दौरान, आगंतुकों को विजय चौक पर होने वाली परेड के लिए यात्रा की तारीखों में बदलाव करने की सलाह दी गई है.
'कर्तव्य पथ' पर कड़ी यातायात व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के दिन कर्तव्य पथ के आसपास यातायात को लेकर प्रतिबंध लगाए हैं. 26 जनवरी को सुबह 4 बजे से कर्तव्य पथ पर आवागमन को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, ताकि परेड की सुरक्षा और संचालन सुनिश्चित किया जा सके. यात्री वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे उत्तर दिल्ली से दक्षिण दिल्ली जाने के लिए मदर टेरेसा क्रिसेंट मार्ग या मथुरा रोड. पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) निशांत गुप्ता ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण चौराहों और गोल चक्कों पर पुलिस तैनात रहेगी और लोग मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे.
झांकियां विरासत और प्रगति की प्रतीक
गणतंत्र दिवस परेड में कम से कम 30 झांकियां कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित होंगी, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्रगति को दर्शाएंगी. इस साल की झांकियां दो मुख्य विषयों पर आधारित हैं: "स्वतंत्रता का मंत्र - वंदे मातरम" और "समृद्धि का मंत्र - आत्मनिर्भर भारत." इनमें से 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी, जबकि 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं से होंगी.
राज्य-स्तरीय झांकियों की विशेषताएं
झांकियों में विभिन्न राज्यों की अनूठी संस्कृति और योगदान भी प्रदर्शित होगा. असम ने अपने शिल्प गांव आशीराकंडी को प्रमुखता दी है. वहीं, गुजरात और छत्तीसगढ़ "वंदे मातरम" के स्वतंत्रता संदेश को प्रस्तुत करेंगे. महाराष्ट्र गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में दिखाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मानित करेगा. ये झांकियां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम होंगी और समारोह की भव्यता में चार चांद लगाएंगी.


