Tamil Nadu Assembly Elections : कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे का सस्पेंस खत्म, जानिए कौन सी पार्टी कितने सीटों पर लड़ेगी चुनाव

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और DMK में औपचारिक बातचीत पूरी हो गई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से फोन पर बात कर सीट शेयरिंग को फाइनल कर दिया है. लंबे गतिरोध और कई दौर की वार्ताओं के बाद कांग्रेस अब 28 विधानसभा और एक राज्यसभा सीट पर लड़ेगी.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

चेन्नई : तमिलनाडु की चुनावी बिसात पर गठबंधन की तस्वीर अब बिल्कुल साफ हो गई है. सत्ताधारी डीएमके और उसकी मुख्य सहयोगी कांग्रेस के बीच हफ्तों से चल रही सीट शेयरिंग की कशमकश आखिरकार बुधवार को समाप्त हो गई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच हुई निर्णायक फोन वार्ता ने इस समझौते पर अंतिम मुहर लगा दी है. इस रणनीतिक समझौते के साथ ही विपक्षी खेमे के मुकाबले सत्ताधारी गठबंधन ने अपनी मजबूत एकजुटता पेश कर दी है. जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी.

खड़गे और स्टालिन की निर्णायक बातचीत

आपको बता दें कि होली के पावन अवसर का लाभ उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को फोन कर चुनावी गठबंधन की औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया. बुधवार सुबह हुई इस लंबी बातचीत में दोनों नेताओं ने राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की. कई दौर की विफल वार्ताओं के बाद खड़गे की इस सीधी पहल ने गठबंधन के भीतर बढ़ रहे असंतोष को शांत कर दिया. इसके साथ ही दोनों दलों के जमीनी कार्यकर्ताओं में अब आने वाले चुनाव को लेकर नया उत्साह दिखाई दे रहा है.

35 सीटों की मांग पर अड़ी थी कांग्रेस 

सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मामला काफी समय तक उलझा रहा. कांग्रेस शुरुआत में 35 सीटों की मांग पर अड़ी थी. जबकि डीएमके उसे 25 से ज्यादा सीटें देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थी. कांग्रेस किसी भी स्थिति में 30 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं थी. अंततः आपसी समझबूझ और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए डीएमके 28 सीटें देने पर राजी हुई. जिसे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य के व्यापक राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए सहजता से स्वीकार किया.

खड़गे को संभालना पड़ा मोर्चा

सीट शेयरिंग का पेचीदा फॉर्मूला सुलझाने के लिए कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी. चिदंबरम ने एमके स्टालिन सहित डीएमके के तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ कई राउंड की गोपनीय मुलाकातें कीं और बीच का सम्मानजनक रास्ता निकालने की भरसक कोशिश की. हालांकि उनके इन तमाम गंभीर प्रयासों के बावजूद शुरू में बात नहीं बन पाई थी. मामला गंभीर होता देख खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे को मोर्चा संभालना पड़ा. जिससे गठबंधन टूटने की सारी आशंकाएं खत्म हो गईं.

पिछले चुनाव का गणित 

पिछले विधानसभा चुनाव में डीएमके ने कांग्रेस को 25 सीटें आवंटित की थीं. जिनमें से पार्टी ने 18 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी. इसी पुराने प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस इस बार 35 विधानसभा और 2 राज्यसभा सीटों की बड़ी दावेदारी पेश कर रही थी. हालांकि. डीएमके ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे 25 विधानसभा और 1 राज्यसभा सीट से ज्यादा कुछ भी देने की स्थिति में नहीं हैं. डीएमके के इस सख्त तेवर ने कांग्रेस को अपनी पुरानी मांगों पर दोबारा विचार करने के लिए पूरी तरह विवश कर दिया था.

जल्द होगी आधिकारिक घोषणा

तय समझौते के अनुसार, अब कांग्रेस राज्य की 28 विधानसभा सीटों के साथ एक राज्यसभा सीट पर भी अपना भाग्य आजमाएगी. इस महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसले के साथ ही तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर गठबंधन ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. इसकी आधिकारिक घोषणा बहुत जल्द एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी. इस तालमेल से सत्ताधारी गठबंधन को पूरी उम्मीद है कि वे अपने साझा चुनावी घोषणापत्र और एजेंडे के साथ मैदान में उतरकर विरोधियों को कड़ी शिकस्त देने में पूरी तरह सफल रहेंगे.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag