ग्रीनलैंड में ट्रंप के बयानों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, अमेरिकी कब्जे के दावे पर भड़का जनआक्रोश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ग्रीनलैंड को खरीद लेंगे' वाले बयानों से बौखला कर नूक की सर्द सड़कों पर सैकड़ों लोग उतर आए है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने संबंधी बयानों के खिलाफ ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है. शनिवार को सैकड़ों लोग राजधानी नूक की सड़कों पर उतरे और अमेरिका के संभावित कब्जे के दावों के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई.

इस प्रदर्शन की अगुवाई खुद ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने की. हाथों में झंडे और बैनर लिए प्रदर्शनकारी अमेरिकी कॉन्सुलेट की ओर मार्च करते नजर आए. प्रदर्शनकारियों ने साफ संदेश दिया कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला यहां के लोग खुद करेंगे.

अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास गूंजा विरोध

प्रदर्शनकारी उस निर्माणाधीन ब्लॉक के पास से होकर गुजरे, जहां अमेरिका अपने नए कॉन्सुलेट को स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है. फिलहाल, अमेरिकी कॉन्सुलेट एक लाल रंग की लकड़ी की इमारत में संचालित होता है, जहां केवल चार कर्मचारी तैनात हैं. नए कॉन्सुलेट को लेकर भी स्थानीय लोगों में असंतोष देखा गया.

US सुरक्षा के लिए क्यो अहम है ग्रीनलैंड

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और वहां मौजूद विशाल खनिज संसाधन अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं. ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी सप्ताह डेनमार्क के अनुरोध पर यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मियों की तैनाती की है, जिससे हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं.

NATO सहयोगियों के बीच बढ़ा राजनयिक तनाव

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बार-बार दिए गए बयानों ने अमेरिका और डेनमार्क के बीच गंभीर राजनयिक संकट पैदा कर दिया है. दोनों देश NATO के संस्थापक सदस्य हैं, बावजूद इसके इस मुद्दे पर रिश्तों में खटास साफ नजर आ रही है. यूरोप के कई देशों में ट्रंप के रुख की तीखी आलोचना हो रही है.

ग्रीनलैंड की स्थिति और डेनमार्क की भूमिका

करीब 57 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड सदियों तक कोपेनहेगन के शासन में रहा है. वर्ष 1979 के बाद से इसे काफी हद तक स्वायत्तता मिली है, लेकिन यह अब भी डेनमार्क का हिस्सा है. रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के नियंत्रण में हैं और प्रशासन का बड़ा खर्च भी वही उठाता है.

स्टीफन मिलर के बयान से बढ़ा विवाद

विवाद उस समय और गहरा गया, जब व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने ट्रंप के दावे को दोहराते हुए कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा करने में सक्षम नहीं है. मीडिया कार्यक्रम हैनिटी में मिलर ने कहा कि किसी क्षेत्र पर नियंत्रण के लिए उसकी रक्षा करना, उसे बेहतर बनाना और वहां रह पाना जरूरी होता है, और डेनमार्क इन तीनों कसौटियों पर खरा नहीं उतरता.

डेनमार्क का पलटवार

डेनमार्क ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए NATO की ज्यादा स्थायी और मजबूत मौजूदगी की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसी रणनीति के तहत यूरोपीय देशों ने सीमित संख्या में सैनिक ग्रीनलैंड भेजे हैं.
ग्रीनलैंड के लोगों और वहां के राजनीतिक नेतृत्व के बीच बेचैनी जरूर है, लेकिन उन्होंने डेनमार्क के साथ एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया है.

अमेरिका में भी ट्रंप की योजना को समर्थन नहीं

अमेरिका के भीतर भी ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की योजना को व्यापक समर्थन नहीं मिल रहा है. मीडिया के एक सर्वे के अनुसार, पांच में से चार अमेरिकी इस अधिग्रहण के प्रयास के खिलाफ हैं. केवल 10 फीसदी अमेरिकी ही मानते हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए अमेरिकी सेना को बल प्रयोग करना चाहिए.

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