मातम में बदला पिकनिक का माहौल, जीजा को बचाने नदी में कूदा साला... दोनों की डूबने से हुई मौत
उत्तर प्रदेश के झांसी में बेतवा नदी में पिकनिक के दौरान जीजा-साले की डूबने से मौत हो गई, जबकि शाहजहांपुर में सोशल मीडिया रील बनाते वक्त दो युवक गर्रा नदी के बाढ़ के पानी में बह गए. दोनों घटनाओं ने गहरी संवेदना और सतर्कता की आवश्यकता को उजागर किया है. प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन युवाओं की लापरवाही ने अनमोल जानें छीन लीं.

Jhansi River Drowning News : उत्तर प्रदेश के झांसी और शाहजहांपुर जिलों से दो अलग-अलग दिल दहला देने वाले हादसों ने प्रदेशभर में सनसनी फैला दी है. झांसी के मोंठ थाना क्षेत्र के बेतवा नदी के खिरियाघाट पर मंगलवार को पिकनिक मनाने पहुंचे एक जीजा और उसके साले की डूबने से मौत हो गई. हादसा उस समय हुआ जब 21 वर्षीय आरिफ, जो कानपुर देहात के नबीपुर का रहने वाला था, अपनी पत्नी आफरीन और तीन बच्चों के साथ अपने साले 19 वर्षीय अरबाज उर्फ भोलू के घर झांसी के मदारगंज मोहल्ला आया हुआ था. ये सभी लोग पिकनिक मनाने के लिए बेतवा नदी के खिरियाघाट पहुंचे थे.
नदी किनारे बैठने के दौरान आरिफ और अरबाज नहाने लगे. इस दौरान आरिफ गहरे पानी और तेज बहाव में बहने लगा. उसे बचाने की कोशिश में अरबाज ने भी नदी में छलांग लगा दी, लेकिन दुर्भाग्यवश दोनों ही पानी में समा गए. पत्नी आफरीन और अन्य परिजन उन्हें ढूंढते रहे लेकिन वे नजरों से ओझल हो गए.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कोई सुराग नहीं...
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम मोंठ अवनीश तिवारी और सीओ अजय श्रोत्रीय मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराया गया, लेकिन देर शाम तक दोनों का कोई सुराग नहीं लगा. गोताखोरों और एसडीआरएफ की मदद से अब बुधवार सुबह से दोबारा तलाश शुरू की गई है.
दूसरी दर्दनाक घटना शाहजहांपुर जिले से...
वहीं, दूसरी दर्दनाक घटना शाहजहांपुर जिले से सामने आई है, जहां सोशल मीडिया पर रील बनाने के चक्कर में दो युवकों की जान चली गई. घुसवारी गांव के कमल कश्यप और रिंकू अपने तीन दोस्तों के साथ सुभाष नगर रोड स्थित गर्रा नदी के बाढ़ग्रस्त हिस्से में नहाने गए थे. नहाते-नहाते इन युवकों ने सोशल मीडिया के लिए रील बनाना शुरू कर दिया. इसी दौरान तेज बहाव और किनारे के गड्ढे में फिसलकर कमल और रिंकू डूब गए. कई घंटों की मशक्कत के बाद दोनों के शव बरामद किए गए.
लापरवाही से गई दो लोगों की जान
ये दोनों घटनाएं न सिर्फ चौंकाने वाली हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि किस तरह लापरवाही, सोशल मीडिया का दबाव और सतर्कता की कमी जानलेवा साबित हो सकती है. झांसी की घटना पारिवारिक दुख में बदल गई, जबकि शाहजहांपुर की घटना आधुनिक युवा पीढ़ी की सोशल मीडिया लत की खतरनाक हदों को उजागर करती है. प्रशासन की ओर से बार-बार चेतावनी के बावजूद लोग गहरे पानी और बाढ़ के क्षेत्रों में लापरवाही से प्रवेश कर रहे हैं, जो उनके लिए जानलेवा बन रहा है.


