बिहार चुनाव 2025: किशनगंज विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद रोचक होने जा रहा है. बिहार के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में कुल चार विधानसभा सीटें आती हैं और ये किशनगंज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और एआईएमआईएम के प्रत्याशी मैदान में हैं. किशनगंज विधानसभा में 11 नवंबर को मतदान होने वाला है. इस चुनाव में कांग्रेस ने मोहम्मद कमरुल होदा को अपना प्रत्याशी बनाया है, जो पहले भी एआईएमआईएम के टिकट पर यहां से जीत हासिल कर चुके हैं. वहीं, भाजपा ने स्वीटी सिंह को फिर से चुनाव मैदान में उतारा है. एआईएमआईएम ने भी शम्स आगाज को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.
किशनगंज की चुनावी हिस्ट्री में पिछले कई दशकों में कई राजनीतिक बदलाव हुए हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के इजहारुल हुसैन ने भाजपा की स्वीटी सिंह को हराकर सीट पर विजय प्राप्त की थी. इस चुनाव में वोटों की टक्कर काफी करीबी थी और दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. आइए जानते हैं किशनगंज विधानसभा चुनाव के इतिहास और इस बार के प्रत्याशियों के बारे में.
किशनगंज विधानसभा क्षेत्र में चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. 1952 में कांग्रेस के कमलेश्वरी प्रसाद यादव ने यहां से जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1957 में कांग्रेस के अब्दुल हयात और 1962 में स्वतंत्र पार्टी के मोहम्मद हुसैन आजाद ने यहां से जीत हासिल की. इसके बाद 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एलएल कपूर और 1969, 1972, 1977 में कांग्रेस के रफीक आलम ने लगातार यहां से जीत हासिल की.
1980 में जनता पार्टी के मो. मुश्ताक, 1985 में लोकदल के मो. मुश्ताक और 1990 में मोहम्मद मुश्ताक ने जीत की हैट्रिक लगाई. 1995 में कांग्रेस के रफीक आलम ने चौथी बार किशनगंज से जीत दर्ज की. 2000 में राजद के तस्लीमुद्दीन, 2005 में राजद के अख्तरुल ईमान, 2010 और 2015 में कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने यहां से जीत दर्ज की. 2019 के उपचुनाव में एआईएमआईएम के कमरुल होदा ने जीत हासिल की और 2020 में कांग्रेस के इजहारुल हुसैन ने भाजपा के स्वीटी सिंह को हराकर जीत दर्ज की.
किशनगंज जिले की विशेषता है कि यह बिहार का एकमात्र ऐसा इलाका है जहां वाणिज्यिक स्तर पर चाय की खेती होती है. इसे अक्सर दार्जिलिंग और पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है. इस जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहां धान, मक्का, जूट और केले की प्रमुख फसलें होती हैं. चाय की खेती ने जिले को एक खास पहचान दिलाई है और यहां का व्यापार क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है.
किशनगंज का यह क्षेत्र कृषि और चाय उद्योग के साथ- साथ यहां की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक महत्व भी इसे खास बनाता है. यही वजह है कि इस विधानसभा क्षेत्र में हर चुनावी मुकाबला एक नया मोड़ लेता है और स्थानीय मतदाताओं के लिए चुनावी गहमा-गहमी का कारण बनता है. First Updated : Sunday, 26 October 2025