ममता बनर्जी की डिजाइन वाली फुटबॉल मूर्ति को किया गया ध्वस्त, विवादित डिजाइन पर उठे थे सवाल
इस प्रतिमा की बनावट शुरू से ही विवादों में रही। इसमें धड़ से कटे हुए दो पैर दिखाए गए थे और उनके ऊपर एक फुटबॉल रखी थी। साथ ही इस पर 'बिश्वा बांग्ला' का लोगो भी बना था, जिसे पिछली टीएमसी सरकार का प्रतीक माना जाता है।

कोलकाता: शनिवार, 23 मई 2026 की सुबह कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर बड़ा बदलाव देखने को मिला। यहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की डिजाइन की हुई फुटबॉल प्रतिमा को तोड़ दिया गया। यह मूर्ति कई सालों से स्टेडियम के बाहर लगी थी और इसे लेकर लगातार बहस चल रही थी। प्रतिमा हटने के बाद इलाके में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विवादित डिजाइन पर उठते रहे सवाल
प्राप्त जानकारियों के मुताबिक इस प्रतिमा की बनावट शुरू से ही विवादों में रही। इसमें धड़ से कटे हुए दो पैर दिखाए गए थे और उनके ऊपर एक फुटबॉल रखी थी। साथ ही इस पर 'बिश्वा बांग्ला' का लोगो भी बना था, जिसे पिछली टीएमसी सरकार का प्रतीक माना जाता है। स्टेडियम आने वाले फुटबॉल फैंस इसे सालों से देख रहे थे। कुछ लोग इसे कला मानते थे तो कई इसे स्टेडियम की खूबसूरती के खिलाफ बताते थे।
शनिवार सुबह दिखी टूटी हुई मूर्ति
शनिवार सुबह जब लोग VVIP गेट के पास पहुंचे तो प्रतिमा टूटी हुई मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग इसे लंबे विवाद का अंत बता रहे हैं। वहीं कई लोग इसे कोलकाता की एक पुरानी पहचान का खत्म होना मान रहे हैं।
बीजेपी नेता ने दिया बयान
मामले पर सियासत भी गरमा गई है। बीजेपी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी यह संरचना अब हटा दी गई है, जैसा पहले कहा गया था। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और बढ़ गई। कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी इस मूर्ति पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि यह संरचना स्टेडियम की सुंदरता के हिसाब से ठीक नहीं है और इसे हटाना जरूरी है। मंत्री ने स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने की बात भी कही थी।
2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगी थी मूर्ति
गौरतलब है कि साल्ट लेक स्टेडियम देश के सबसे बड़े फुटबॉल मैदानों में से एक है। यहां ईस्ट बंगाल और मोहन बागान जैसे बड़े मुकाबले होते हैं। पिछले साल फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में भी यहां भारी भीड़ जुटी थी। यह प्रतिमा 2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगाई गई थी।
शुरुआत से ही इसे लेकर दो राय थीं। कुछ इसे स्टेडियम की पहचान कहते थे तो कुछ इसे अजीब और विवादित बताते थे। अब इसके हटने के बाद कोलकाता में खेल और सियासत दोनों मोर्चों पर नई बहस शुरू हो गई है।


