महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव आ रहे हैं. वरिष्ठ नेता शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है. ऐसे में उनके दोबारा संसद पहुंचने की राह मुश्किल लग रही है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पवार के पास जरूरी समर्थन नहीं है.
शरद पवार को लेकर ओवैसी का बड़ा दावा
AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने शरद पवार के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि पवार का राज्यसभा सदस्यता मार्च-अप्रैल तक खत्म हो रही है. उनके गठबंधन में इतने विधायक नहीं हैं जो उन्हें फिर से राज्यसभा भेज सकें.
ओवैसी ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर काफी हलचल होगी. यह बयान महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के समय आया था, जब राजनीतिक माहौल गर्म था. ओवैसी का इशारा साफ है कि संख्या बल के बिना राज्यसभा जाना आसान नहीं होगा.
शरद पवार की राज्यसभा में एंट्री क्यों है मुश्किल ?
राज्यसभा चुनाव विधानसभा के विधायकों के वोट से होते हैं. महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटें हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत हासिल किया. महायुति के पास करीब 235 से ज्यादा सीटें हैं, जबकि विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के पास सिर्फ 50 के आसपास सीटें बची हैं. शरद पवार की पार्टी एनसीपी (शरदचंद्र पवार) को बहुत कम सीटें मिली.
उनके गठबंधन में कुल विधायकों की संख्या इतनी कम है कि एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए जरूरी वोट भी पूरा करना चुनौतीपूर्ण है. एक सीट के लिए लगभग 36-37 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में पवार का फिर से राज्यसभा जाना लगभग नामुमकिन दिख रहा है. खुद पवार ने भी संकेत दिए हैं कि वे 2026 के बाद सक्रिय चुनावी राजनीति से दूर रह सकते हैं.
2026 में कई दिग्गजों का कार्यकाल खत्म
2026 राज्यसभा चुनाव राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होंगे. कुल 72-75 सीटें खाली होंगी. इनमें कई बड़े नेता शामिल हैं:
महाराष्ट्र से 7 सीटें खाली होगी. उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 10 सीटें नवंबर में रिक्त होगी. अप्रैल में महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव होंगे. इन चुनावों से संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष की ताकत में बड़ा बदलाव आ सकता है. First Updated : Monday, 05 January 2026