बारामतीः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन एक विमान हादसे में हो गया. वह पार्टी के गढ़ माने जाने वाले बारामती जा रहे थे, तभी उनका विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उनके अचानक निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई. यह हादसा ऐसे समय में हुआ, जब अटकलें तेज थीं कि अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के खेमे में वापसी कर सकते हैं.
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में दादा कहे जाते हैं. उनका करियर उतार-चढ़ाव और रणनीति से भरा रहा है. नवंबर 2019 में उन्होंने सिर्फ 80 घंटे में सत्ता का बड़ा खेल दिखाया था. उस समय महाराष्ट्र में कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत नहीं ला पाई थी. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन सरकार बनाने के लिए आंकड़ा उसके पास नहीं था. इसी बीच शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच गठबंधन की बातचीत चल रही थी, और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था.
एनसीपी में पहले से ही टिकट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर नाराजगी थी. अजित पवार को लगा कि पार्टी में उनकी भूमिका पर्याप्त महत्व नहीं रखती. 22 नवंबर की देर रात उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी को समर्थन पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने एनसीपी के सभी 54 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया. इसका मकसद साफ था. किसी भी तरह सरकार बनाना.
अगली सुबह 23 नवंबर को देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार सुबह 5:30 बजे राजभवन पहुंचे. राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की गई और सुबह 8 बजे गुपचुप तरीके से शपथ ग्रहण समारोह हुआ. देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने और अजित पवार उपमुख्यमंत्री.
हालांकि, यह सरकार मजबूत नहीं थी. शरद पवार ने तुरंत स्पष्ट कर दिया कि यह कदम पार्टी का नहीं, बल्कि अजित पवार का व्यक्तिगत निर्णय है. एनसीपी ने उन्हें विधायक दल नेता के पद से हटा दिया और कांग्रेस, शिवसेना व एनसीपी ने अपने विधायकों को एकजुट करना शुरू किया. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, और अदालत ने फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया. बहुमत साबित करने से पहले ही स्पष्ट हो गया कि सरकार बचाना संभव नहीं था. 26 नवंबर को देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार दोनों ने इस्तीफा दे दिया. इस प्रकार, सिर्फ 80 घंटे में सरकार इतिहास बन गई.
इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महा विकास अघाड़ी की सरकार बनी. अजित पवार कुछ समय बाद फिर एनसीपी में लौट आए और परिवार के भीतर रिश्तों को संभालने की कोशिश की. फिर भी, उन्होंने खुद को राजनीतिक रूप से हाशिये पर पाया. 2023 में उन्होंने फिर एक बड़ा कदम उठाया, जब एनसीपी छोड़कर फडणवीस-शिंदे गठबंधन में डिप्टी सीएम बने. उन्होंने वित्त मंत्रालय और उपमुख्यमंत्री का पद अपने शर्तों पर हासिल किया.
अजित पवार का करियर हमेशा रणनीति, नाटकीय बदलाव और राजनीति की बारीकियों से भरा रहा. उनका निधन केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी एक गहरा शून्य छोड़ गया. उनके योगदान और विवादास्पद पावर गेम को लंबे समय तक याद किया जाएगा. First Updated : Wednesday, 28 January 2026