पटनाः आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव करीब एक महीने से अधिक समय बाद बिहार लौटे हैं. रविवार को पटना पहुंचते ही उन्होंने साफ कर दिया कि अब वे पूरी तरह सक्रिय राजनीति में लौट चुके हैं. मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी पुराने आक्रामक अंदाज में नजर आए और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को लेकर कई अहम बातें कहीं.
तेजस्वी यादव ने पिछले विधानसभा चुनावों को लेकर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि हालिया चुनाव में लोकतंत्र में ‘लोक’ की हार हुई और ‘तंत्र’ की जीत हुई. उनका आरोप था कि जनतंत्र को धनतंत्र और मशीन तंत्र में बदल दिया गया. तेजस्वी ने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए साजिश और छल-कपट का सहारा लिया गया, जिससे नई सरकार का गठन हुआ.
तेजस्वी यादव ने घोषणा की कि वे मौजूदा सरकार को 100 दिन का समय देंगे. इस दौरान वे सरकार के फैसलों और नीतियों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि यह देखा जाएगा कि सरकार अपने वादों पर कितनी खरी उतरती है, खासकर माताओं, बहनों और युवाओं के लिए किए गए ऐलानों को लेकर.
आरजेडी नेता ने कहा कि सरकार ने एक करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था. उन्होंने सवाल उठाया कि यह वादा कब और कैसे पूरा होगा. तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि सरकार की जिम्मेदारी है कि अपने चुनावी घोषणापत्र को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखे, बल्कि उसे जमीन पर उतारे. उन्होंने दोहराया कि 100 दिन तक वे सरकार को काम करने देंगे और उसके बाद ही अपना रुख स्पष्ट करेंगे.
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तेजस्वी यादव लंबे समय तक सार्वजनिक मंच से दूर रहे. करीब 100 दिनों बाद उनकी यह वापसी राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम मानी जा रही है. इस दौरान बीजेपी और जेडीयू की ओर से उनके गायब रहने को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे.
विधानसभा चुनाव में आरजेडी को मात्र 25 सीटें मिली थीं. अगर एक भी सीट कम होती, तो तेजस्वी का नेता प्रतिपक्ष बनना मुश्किल हो जाता. उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के भीतर और बाहर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं. विपक्ष की भूमिका निभाने में पार्टी की सक्रियता पर भी सवाल खड़े किए गए.
इस बीच कांग्रेस ने भी बिहार में ‘एकला चलो’ की रणनीति के संकेत दिए हैं, जिससे महागठबंधन की राजनीति पर असर पड़ सकता है. वहीं, तेजस्वी के लिए पारिवारिक और संगठनात्मक चुनौतियां भी कम नहीं हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेजस्वी यादव नए तेवर में नजर आ सकते हैं और पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की संभावनाएं भी बन रही हैं.
तेजस्वी यादव की वापसी के साथ ही बिहार की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि 100 दिन बाद वे किस तरह सरकार को घेरते हैं और आरजेडी को किस दिशा में आगे ले जाते हैं.
First Updated : Sunday, 11 January 2026