अब सड़क पर ही खुलेगा अपराधियों का काला चिट्ठा! पुलिस के हाथ लगा हाईटेक हथियार

देश में अपराध जांच को तेज और आधुनिक बनाने के लिए एक नई तकनीक लॉन्च की गई है. एक नए पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर और मोबाइल ऐप की मदद से पुलिसकर्मी मौके पर ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे.

calender

नई दिल्ली: देश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया गया है. अब पुलिस और जांच एजेंसियों को ऐसी आधुनिक सुविधा मिलने जा रही है, जिससे अपराधियों की पहचान करना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा. एक नए पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर और मोबाइल ऐप की मदद से पुलिसकर्मी मौके पर ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान कर सकेंगे और कुछ ही सेकंड में उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे. इस नई तकनीक को अपराध नियंत्रण और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

इस नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 'अभिज्ञान' नाम का एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को इस ऐप का शुभारंभ किया. यह ऐप NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) से जुड़ा हुआ है, जिसमें देशभर के आरोपियों, दोषियों और जेल में बंद कैदियों के फिंगरप्रिंट सुरक्षित रखे गए हैं. इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी सुविधा उपलब्ध कराना है, जिससे वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान तुरंत कर सकें और उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी बिना देरी के हासिल कर सकें.

सड़क पर ही हो सकेगी संदिग्धों की पहचान

नई तकनीक के आने के बाद पुलिस को हर बार किसी व्यक्ति को थाने ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पुलिसकर्मी पोर्टेबल स्कैनर की सहायता से मौके पर ही अंगूठे या उंगलियों के निशान लेकर उन्हें डेटाबेस से मिलान कर सकेंगे. बताया गया है कि सिस्टम कुछ ही सेकंड में रिकॉर्ड खंगाल सकता है. डेमो के दौरान यह भी दिखाया गया कि फिंगरप्रिंट का मिलान करीब 35 सेकंड के भीतर पूरा हो जाता है. इससे फरार या वांटेड अपराधियों की पहचान करने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है.

स्मार्टफोन पर मिलेगा रियल-टाइम रिजल्ट

अब तक फिंगरप्रिंट सत्यापन की सुविधा मुख्य रूप से देशभर के थानों और जिला मुख्यालयों में स्थापित 1,556 विशेष वर्कस्टेशनों तक सीमित थी. ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि के लिए उसे संबंधित कार्यालय तक ले जाना पड़ता था. लेकिन अभिज्ञान ऐप के जरिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सीधे अपने स्मार्टफोन पर ही आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगी. 

यह ऐप टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा प्रणाली से लैस है, जिससे डेटा सुरक्षित रहेगा और परिणाम रियल टाइम में उपलब्ध होंगे. NAFIS डेटाबेस में करोड़ों रिकॉर्ड मौजूद हैं. इसमें नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और विभिन्न जेल रिकॉर्ड से जुड़ी बड़ी मात्रा में जानकारी संग्रहीत है, जिससे जांच एजेंसियों को व्यापक सहायता मिल सकेगी.

अपराध जांच में तकनीक की बढ़ेगी भूमिका

गृह मंत्री अमित शाह ने लॉन्च कार्यक्रम के दौरान कहा कि केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समय पर सजा दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि फिंगरप्रिंट, डीएनए, मोबाइल टावर डेटा, फेस रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य जांच को मजबूत बनाते हैं. यदि इन तकनीकी प्रमाणों को सही तरीके से चार्जशीट का हिस्सा बनाया जाए तो अदालत में मामलों को मजबूत आधार मिलता है और अपराधियों को सजा दिलाने की संभावना बढ़ जाती है. First Updated : Saturday, 20 June 2026

Topics :