Swiggy: अहमदाबाद की एक उपभोक्ता अदालत ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी को एक ग्राहक को रद्द किए गए ऑर्डर के कारण हुई मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में ग्राहक को ब्याज के साथ 104 रुपये लौटाने और 1,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.
आपको बता दें कि, एक प्रसाद कनाडे नाम के शख्स ने साल 2022 में स्विगी के खिलाफ एक याचिका दायर की थी. यह याचिका मिठाई डिलीवरी न करने और पूरा पैसा रिफंड न मिलने के बाद की गई थी.
ऑर्डर कैंसिल होने के बाद शख्स ने स्विगी के खिलाफ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई. जिसके बाद स्विगी ने तर्क दिया कि उन्होंने एक मध्यस्थ के रूप में काम किया, ग्राहकों को रेस्तरां और डिलीवरी एजेंटों से जोड़ा, और उन्हें ऑर्डर संबंधी मुद्दों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने यह भी दावा किया कि शख्स ने खुद ही ऑर्डर कैंसिल किया था.
अब हाल ही में इस मामले पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है. उपभोक्ता अदालत ने कस्टमर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्विगी को आदेश दिया है कि, वह कस्टमर का पैसा वापिस करें. अदालत ने स्विगी को 104 रुपये 9% ब्याज के साथ कस्टमर को वापस करने का आदेश दिया है. इसके अलावा कोर्ट ने स्विगी को मानसिक तनाव के साथ-साथ मुकदमेबाजी की लागत के लिए मुआवजे के रूप में 1,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है.
दरअसल, यह मामला साल 2022 का है. अहमदाबाद के भद्रा के रहने वाले एक शख्स प्रसाद कनाडे ने स्विगी के खिलाफ याचिका दायर की थी. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि, नवंबर 2022 में उन्होंने स्विगी पर मिठाई का ऑर्डर दिया था लेकिन उसे कभी ऑर्डर नहीं मिला. उन्होंने ऑर्डर के लिए 549 रुपये का भुगतान किया, लेकिन उन्हें केवल 445 रुपये का आंशिक रिफंड मिला.
इसके अलावा कस्टमर ने अपनी शिकायत में कहा था कि, स्विगी ने ऑर्डर कैंसिल करने के बारे में पहले से बताया भी नहीं. वहीं जब उन्होंने स्विगी को इस बारे में शिकायत की तो कंपनी ने कुछ जवाब नहीं दिया. First Updated : Monday, 13 May 2024