नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए उनके नौवें बजट में पर्यावरण और आम आदमी की जेब, दोनों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया गया है. अब खेतों में बची हुई पराली और शहरों से निकलने वाले कूड़े-कचरे से तैयार बायोगैस केवल प्रदूषण कम करने का माध्यम नहीं रह जाएगी, बल्कि यह वाहन चालकों के लिए ईंधन की लागत घटाने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी.
बायो CNG पर कम होगा टैक्स का बोझ
आपको बता दें कि सरकार ने बजट के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि बायोगैस आधारित सीएनजी (Bio-CNG Mix) पर टैक्स के बोझ को कम किया जाएगा, जिससे न केवल स्वच्छ हवा का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि सीएनजी वाहनों का परिचालन भी सस्ता हो जाएगा. यह कदम सीधे तौर पर मध्यम वर्ग और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत पहुंचाने वाला नजर आ रहा है.
इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक 'सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी' (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) की गणना के तरीके में बदलाव है. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जब बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर उत्पाद शुल्क की गणना की जाएगी, तब उसमें बायोगैस के पूरे मूल्य (Full Price) को शामिल नहीं किया जाएगा. इसका अर्थ यह है कि बायोगैस वाले हिस्से पर कोई कर नहीं लगेगा.
पहले बायोगैस भी टैक्स के दायरे में था
दरअसल, पहले की व्यवस्था में, बायोगैस की कीमत को भी टैक्स गणना के दायरे में रखा जाता था, जिससे अंतिम उत्पाद महंगा हो जाता था. इस नई व्यवस्था के लागू होने से बायोगैस वाली सीएनजी की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे बाजार में इसकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और तेल कंपनियों को इसे अधिक मात्रा में मिश्रित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.
ऑटोमोबाइल सेक्टर में बायोगैस की बढ़ती भूमिका
बायोगैस का निर्माण कृषि अपशिष्ट, फसल अवशेष और नगरीय ठोस कचरे के प्रसंस्करण से किया जाता है. जब इसे नियमित सीएनजी में मिलाया जाता है, तो यह एक कम कार्बन उत्सर्जन वाला 'ग्रीन फ्यूल' बन जाता है. भारत जैसे देश में, जहां पराली जलाना एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है, वहां बायोगैस का उत्पादन एक स्थायी समाधान के रूप में उभर रहा है.
ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इस बदलाव को भांपते हुए तेजी से ऐसे वाहन बाजार में उतार रही हैं जो इस वैकल्पिक ईंधन पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें. सरकार का मानना है कि इस नीति से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि 'क्लीन एनर्जी' के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी भारत को बड़ी बढ़त मिलेगी.
यदि हम पिछले नियमों पर नजर डालें, तो साल 2023 में सरकार ने बायोगैस क्षेत्र को कुछ आंशिक राहतें दी थीं. उस समय, केवल बायोगैस पर चुकाए गए जीएसटी को ही एक्साइज ड्यूटी से घटाने की अनुमति थी, लेकिन बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट का कोई प्रावधान नहीं था. इसके कारण 'टैक्स पर टैक्स' की स्थिति बनी रहती थी और उपभोक्ताओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता था.
पहले बायोगैस पर 9 % एक्साइज ड्यूटी लगती थी
वर्तमान में, नियमित सीएनजी पर लगभग 14 प्रतिशत की दर से सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगती है, जो प्रति किलो करीब 14 से 15 रुपये तक होती है. पुराने नियमों के तहत बायोगैस वाले हिस्से पर भी लगभग 9 प्रतिशत कर का बोझ बना रहता था, जिसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है.
अर्थव्यवस्था पर इस फैसले का व्यापक प्रभाव
नई पॉलिसी के तहत बायोगैस के मूल्य को कर मुक्त करने से प्रति किलो सीएनजी की कीमत में कुछ रुपयों की सीधी कमी आने की संभावना है. यह राहत केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा लाभ उन लाखों ट्रक, कार और तीन-पहिया वाहन मालिकों को मिलेगा जो सीएनजी पर निर्भर हैं.
विशेष रूप से कमर्शियल वाहन ऑपरेटरों के लिए, जो डीजल के बढ़ते दामों से परेशान हैं, बायोगैस मिश्रित सीएनजी एक किफायती और टिकाऊ विकल्प बनकर उभरेगा. अंततः, यह कदम विदेशों से आयात किए जाने वाले कच्चे तेल और गैस पर भारत की निर्भरता को कम करेगा, जिससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और घरेलू कचरा प्रबंधन की समस्या का भी वैज्ञानिक समाधान निकलेगा.
First Updated : Sunday, 01 February 2026