बेंगलुरु: जब हम कैब बुक करते हैं और ड्राइवर कुछ मिनट देर से पहुंचता है, तो गुस्सा होना आम बात है. एसी में आराम से बैठे पैसेंजर अक्सर यह भूल जाते हैं कि स्टेयरिंग के पीछे बैठा व्यक्ति हर दिन कितनी मानसिक और शारीरिक थकान से गुजरता है. बेंगलुरु के एक कैब ड्राइवर ने सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी की सच्चाई शेयर की है, जिसने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
यह कहानी सिर्फ एक ड्राइवर की नहीं है, बल्कि उस इकॉनमी की असल तस्वीर है, जिस पर बड़े शहरों की रफ्तार टिकी हुई है. रेडिट पर वायरल हो रही इस पोस्ट को पढ़ने के बाद शायद कोई भी यात्री अगली बार ड्राइवर पर गुस्सा करने से पहले एक बार जरूर ठहरे.
वायरल पोस्ट में ड्राइवर ने बताया कि डेढ़ साल तक नौकरी न मिलने और एक बिजनेस के पूरी तरह फेल हो जाने के बाद उसे कैब ड्राइविंग का रास्ता अपनाना पड़ा. सिर पर कर्ज का बोझ था और क्रेडिट कार्ड के बिल लगातार बढ़ते जा रहे थे. मजबूरी में उसने रोजाना 1,500 रुपये किराये पर एक ‘येलो बोर्ड’ कार ली और सड़कों पर उतर गया.
ड्राइवर के अनुसार, गाड़ी चलाना तो बस शुरुआत थी. असली जंग इसके बाद शुरू हुई. उसने लिखा कि वह रोज करीब 16 घंटे गाड़ी चलाता है. लगातार बैठने से घुटने दर्द करने लगते हैं, आंखों में जलन होती है और ट्रैफिक में हर पल सतर्क रहना पड़ता है. मोबाइल स्क्रीन पर नजर टिकाए रखना जरूरी होता है ताकि कोई राइड मिस न हो जाए. लंबी शिफ्ट, ट्रैफिक का तनाव और ऐप की रेटिंग का डर उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
ड्राइवर ने अपनी एक दिन की कमाई का जो हिसाब बताया, वह चौंकाने वाला है. 16 घंटे काम करने के बाद उसका मैथ कुछ इस तरह बनता है:-
कुल कमाई: ₹4,000
गाड़ी का किराया: ₹1,500
सीएनजी खर्च: ₹1,200
खाना-पानी: ₹200
बचत: करीब ₹1,100
उसने लिखा कि इतनी मेहनत के बाद हाथ में सिर्फ लगभग 1,000 रुपये ही बचते हैं. ऐप पूरी तरह ‘फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट’ पर चलता है. अगर 5 सेकंड में राइड स्वीकार न की जाए तो रेटिंग गिरने लगती है. उसने सवाल किया, क्या यही जिंदगी है?
पोस्ट के आखिर में ड्राइवर ने एक कड़वी लेकिन सच्ची बात लिखी. उसने कहा कि भारत में करोड़ों लोग ऐसी ही जिंदगी जी रहे हैं ताकि बाकी लोग आराम और सुविधाओं का आनंद ले सकें.
इस पोस्ट ने इंटरनेट पर भावनात्मक बहस छेड़ दी. एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी ने उसे हर उस डिलीवरी बॉय और ड्राइवर का दर्द महसूस करा दिया, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि उसने अब ड्राइवरों को टिप देना शुरू कर दिया है. चाहे 10 या 20 रुपये ही क्यों न हों क्योंकि उनकी मुस्कान बहुत कुछ कह जाती है.
पूरा सिस्टम बदलना आसान नहीं है, लेकिन एक पैसेंजर के रूप में कुछ छोटी आदतें किसी का दिन बेहतर बना सकती हैं.
समय की कद्र करें: कैब पहुंचते ही बाहर आ जाएं, क्योंकि ड्राइवर के लिए हर मिनट कीमती होता है.
टिप और रेटिंग दें: अगर यात्रा अच्छी रही हो तो छोटी सी टिप या 5-स्टार रेटिंग जरूर दें, इससे उनके इंसेंटिव पर फर्क पड़ता है.
कैंसिलेशन से बचें: ड्राइवर के पहुंचने के बाद राइड कैंसिल करना उनके समय और ईंधन दोनों की बर्बादी है. First Updated : Friday, 30 January 2026