Google Map ने दिया धोखा! शादी में जा रहा परिवार पहुंचा नाले में

हापुड़ में गूगल मैप का रास्ता फॉलो करते हुए शादी में जा रहा एक परिवार पानी से भरे नाले में फंस गया, जिसके बाद करीब दो घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में गूगल मैप पर भरोसा करना एक परिवार के लिए भारी पड़ गया. शादी समारोह में शामिल होने जा रहा परिवार गलत रास्ते पर पहुंच गया और उनकी कार पानी से भरे नाले में फंस गई. हालांकि समय रहते राहत एवं बचाव दल ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया.

मैप की सहायता से यात्रा कर रहा था परिवार

जानकारी के अनुसार, दादरी से मेरठ के किठौर जा रहा एक परिवार गूगल मैप की सहायता से यात्रा कर रहा था. इसी दौरान वाहन हापुड़ के शामनगर क्षेत्र में पहुंचा, जहां सड़क पर काफी पानी जमा था. परिवार को लगा कि वाहन आसानी से निकल जाएगा, लेकिन कुछ ही दूरी पर कार नाले में उतर गई और बीच में फंसकर रह गई. कार में परिवार के चार सदस्य और कुछ बच्चे सवार थे, जो अचानक आई इस स्थिति के कारण बाहर नहीं निकल सके.

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची. बचावकर्मियों ने करीब दो घंटे तक अभियान चलाकर कार में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी को चोट नहीं आई और कोई जनहानि भी नहीं हुई.

साहिल ने क्या बताया?

कार चला रहे साहिल ने बताया कि उनका परिवार दादरी से किठौर में एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था. रास्ते के लिए उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया था. जब वे पानी से भरे हिस्से तक पहुंचे तो उन्हें लगा कि कार आसानी से निकल जाएगी, लेकिन वाहन बीच रास्ते में फंस गया. इसके बाद उन्होंने मदद के लिए फोन किया, जिसके बाद रेस्क्यू टीम वहां पहुंची.

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार गूगल मैप द्वारा बताए गए ऐसे रास्ते पर पहुंच गया था, जो सुरक्षित नहीं था. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल वाहन को भी नाले से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है.

रेस्क्यू अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद टीम मौके पर पहुंची और सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया. उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई होने के कारण किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय यात्रियों को स्थानीय परिस्थितियों और रास्तों की वास्तविक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए.

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