यह कहानी एक ऐसे लड़के की है जो कॉलेज में लगातार फेल होता रहा। उसके नंबर कभी अच्छे नहीं रहे। वह खुद को हमेशा पीछे महसूस करता था। बारहवीं में भी उसे औसत अंक मिले। इंजीनियरिंग की परीक्षाओं में भी वह सफल नहीं हुआ। उसे लगा कि वह जिंदगी की रेस हार रहा है। यही सोच उसे अंदर से तोड़ रही थी।
उसने बीएससी मैथ्स में दाखिला लिया लेकिन कॉलेज उसकी उम्मीद से बहुत नीचे था। पहले ही सेमेस्टर में वह सभी विषयों में फेल हो गया। कोविड के समय हालात और बिगड़ गए। घर में बंद रहने से तनाव बढ़ गया। पढ़ाई टूटती चली गई। 2022 और 2023 की परीक्षाओं में भी वह सफल नहीं हुआ। हर नतीजा उसे और कमजोर बना रहा था।
इसी दौरान उसकी सेहत ने भी साथ छोड़ दिया। उसे किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी हो गई। इलाज और दवाइयों में समय और पैसा दोनों लगने लगे। मानसिक दबाव बहुत बढ़ गया। कई बार उसे लगा कि सब खत्म हो गया है।लेकिन उसने हार मानने से इनकार कर दिया। उसने खुद को संभालने का फैसला किया। यहीं से असली लड़ाई शुरू हुई।
कॉलेज के बाद उसने खुद से कोडिंग सीखनी शुरू की। यूट्यूब और ऑनलाइन कोर्स उसकी क्लास बन गए। रोज घंटों प्रैक्टिस करता रहा। धीरे धीरे उसे आत्मविश्वास मिलने लगा। उसका सपना साफ होने लगा। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता था। डिग्री नहीं हुनर उसकी ताकत बन गया।
2023 में उसे पहली पार्ट टाइम टेक जॉब मिली। कुछ महीनों में फुल टाइम रोल भी मिल गया। उसकी सैलरी छह लाख सालाना थी। वह खुश था कि मेहनत रंग ला रही है। लेकिन पांच महीने बाद कंपनी ने उसे निकाल दिया।यह फिर से बड़ा झटका था।फिर भी उसने खुद को टूटने नहीं दिया।
उसने दोबारा इंटरव्यू देना शुरू किया।कई बार रिजेक्शन मिले।कई बार उम्मीद जगी और टूटी भी।लेकिन वह रुका नहीं।अक्टूबर 2025 में दो स्टार्टअप से ऑफर मिला।उसने एक कंपनी जॉइन की।यहां उसे 21 लाख का पैकेज और ईएसओपी मिले।वह वही लड़का था जिसे कभी फेल कहा जाता था।
अब वह 25 साल का है और खुद पर गर्व करता है।उसकी कहानी हजारों युवाओं को हिम्मत दे रही है।लोग कह रहे हैं कि डिग्री सब कुछ नहीं होती।सीखते रहना और खुद पर भरोसा रखना सबसे बड़ी ताकत है।उसने साबित कर दिया कि मेहनत कभी धोखा नहीं देती।नाकामी सिर्फ एक पड़ाव होती है।सफलता का रास्ता आगे खुलता है। First Updated : Monday, 12 January 2026