नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. जहां पहले कांग्रेस का मुख्य निशाना भाजपा होती थी, वहीं अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और ममता बनर्जी भी कांग्रेस के सीधे निशाने पर हैं. यह बदलाव चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
पहले चरण के मतदान के बाद आसनसोल में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की हत्या ने इस सियासी टकराव को और तेज कर दिया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि टीएमसी से जुड़े लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं.
घटना के बाद राहुल गांधी ने X पर पोस्ट करते हुए टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा, "कांग्रेस के कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की चुनाव बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाज़ों को डराना, मारना, मिटाना- यही TMC का चरित्र बन चुका है. भारत की अहिंसक परंपरा को कलंकित करने वाली इस राजनीति के सामने हम झुकेंगे नहीं. न्याय होकर रहेगा.'"
पिछले चुनावों पर नजर डालें तो राहुल गांधी ने बंगाल में सीमित प्रचार किया था. 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने केवल दो रैलियां की थीं और 2024 लोकसभा चुनाव में तो वे प्रचार के लिए राज्य तक नहीं गए थे.
उनकी रैलियों में भी भाजपा ही मुख्य निशाने पर रहती थी और ममता बनर्जी या टीएमसी पर सीधा हमला कम ही देखने को मिला था. लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है और राहुल गांधी टीएमसी पर खुलकर हमला कर रहे हैं.
इस चुनाव में राहुल गांधी ने अब तक पांच जनसभाएं की हैं और हर मंच से टीएमसी को निशाने पर लिया है. उनका कहना है कि बंगाल में टीएमसी की वजह से ही भाजपा मजबूत हुई है और केवल कांग्रेस ही भाजपा का मुकाबला कर सकती है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और टीएमसी के बीच सांठगांठ है और जहां अन्य विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई हो रही है, वहीं ममता बनर्जी के खिलाफ कोई केस नहीं चल रहा.
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कांग्रेस बंगाल में अपनी खोई जमीन वापस पाना चाहती है. इसके लिए टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगाना जरूरी माना जा रहा है, खासकर अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच.
राहुल गांधी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा का असली मुकाबला कांग्रेस ही कर सकती है, जिससे वह उस वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं.
यह भी माना जा रहा है कि इस बार बंगाल में टीएमसी को भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है. ऐसे में यदि चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होते हैं, तो कांग्रेस खुद को भाजपा के खिलाफ मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित करना चाहती है, न कि टीएमसी को.
यही वजह है कि इस चुनाव में कांग्रेस का रुख अधिक आक्रामक नजर आ रहा है. First Updated : Sunday, 26 April 2026