कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? बंगाल में बीजेपी के बने पहले मुख्यमंत्री, जानें कुल कितनी संपत्ति के मालिक
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बहुमत से जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी सीएम पद के लिए चुना गया है. इसी बीच चलिए जानते है कि कौन है सुवेंदु अधिकारी?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी की बहुमत से जीत के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री का ऐलान कर दिया गया है. बता दें, सीएम पद के लिए सुवेंदु अधिकारी को चुना गया है, जिनकी पश्चिम बंगाल में जीत के पीछे कड़ी मेहनत के साथ-साथ अहम भूमिका भी रही है. सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 2 बार कड़ी टक्कर देते हुए जीत हासिल की है. इसी बीच चलिए जानते है कि कौन है सुवेंदु अधिकारी, कैसा रहा है उनका राजनीतिक सफर और वह कितनी संपत्ति के मालिक है.
कितने वोटों से हासिल की जीत?
सुवेंदु अधिकारी 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे लेकिन इससे पहले भी 2021 के विधानसभा चुनाव वह ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हरा चुके है. उस दौरान सुवेंदु ने ममता के खिलाफ 1,956 वोट हासिल थे. वहीं 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु भवानीपुर सीट पर 15,105 हासिल करते हुए ममता बनर्जी को भारी अंतर के साथ हराया है. इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी प्रत्याशी पबित्रा कर के खिलाफ नंदीग्राम सीट से भी, 9,665 वोटों के साथ जीत हासिल की है.
कब रखा राजनीती में कदम
बता दें, चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ऐसा कहा गया था कि बंगाल में वहीं सीएम वही उमीदवार बनेगा, जो बंगाल में जन्मा है और जिसने यहां से ही अपनी शिक्षा प्राप्त की है. चुनाव में जीत के बाद पार्टी अपने इन वादों को पूरा करती नज़र आ रही है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब सुवेंदु ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे. नेता ने अपने शुरुआती रानीतिक सफर में कृषि प्रधान पूर्व मेदिनीपुर जिले कार्य किया और अपना दबदबा कायम किया. हालांकि 2020 में वह तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो गए, जो उनके राजनीतिक सफर में अहम कदम साबित हुआ.
सुवेंदु के शुरुआती सालों की बात करें तो आरएसएस शाखाओं में प्रशिक्षित सुवेंदु ने 1980 के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन छात्र परिषद के सदस्य के रूप में राजनीति में प्रवेश किया. 1995 में, सुवेंदु ने पहली बार राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई और कांथी नगरपालिका के पार्षद चुने गए. वहीं उनके पिता शिशिर अधिकारी भी 1967 से 2009 तक पार्षद रहे.
कब मिली सफलता
1999 में अपने पिता के साथ टीएमसी में शामिल होने के बाद सुवेंदु को 2001 और 2004 यानी 2 बार चुनाव में हार का स्वाद चखना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2006 में उन्हें कोंटाई विधानसभा सीट जीत हासिल हुई.
क्यों हुए टीएमसी से अलग
2007 के नंदीग्राम कृषि भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने बंगाल के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया. इस दौरान सुवेंदु टीएमसी का एक खास चेहरा बन गए. वे जल्द ही टीएमसी के "कोर ग्रुप" के सदस्य बन गए और पार्टी की युवा कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त किए गए. 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, अधिकांश लोग सुवेंदु बनर्जी को उनका उत्तराधिकारी मान रहे थे.
हालांकि, 21 जुलाई को टीएमसी की पहली वार्षिक शहीद दिवस रैली में, ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राजनीति में उतारा और 24 वर्षीय अभिषेक को टीएमसी के युवा विंग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जो कांग्रेस के समकक्ष टीएमसी का युवा विंग है. इस फैसले से सुवेंदु नाराज हो गए. वहीं 2014 में सुवेंदु को टीएमसी के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया.
सुवेंदु अधिकारी की संपत्ति
चुनाव आयोग को सौपे गए हलफनामे के अनुसार, सुवेंदु की नेटवर्थ 1 करोड़ से भी कम है. बता दें, उनकी कुल संपत्ति 85.87 लाख बताई गई है, जिसमें कोई कर्ज शामिल नहीं है. उनके बैंक अकाउंट में 7 लाख रुपए की जमा राशि बताई गई है. इसके साथ ही उनके बाद 9 रुपए की अचल संपत्ति है, जो एक कृषि भूमि है. इसके अलावा उनकी संपत्ति में पास नॉन एग्रीकल्चर लैंड-प्लॉट, LIC, तीन फ्लैट जैसी कई चीजें शामिल है.


