ईरान संग जंग रोकने के ट्रंप के ऐलान के बाद गिरे कच्चे तेल के दाम, 13% की गिरावट दर्ज

ट्रंप के ईरान के साथ सकारात्मक वार्ता संकेतों के बाद तेल कीमतों में तेज गिरावट आई, जिससे बाजार को राहत मिली. हालांकि, Strait of Hormuz को लेकर तनाव बना हुआ है और बातचीत की दिशा पर ही आगे कीमतों का रुख तय होगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को वैश्विक तेल बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत में सकारात्मक प्रगति के संकेत दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. इस बदलाव ने निवेशकों को राहत दी, जो दिन की शुरुआत में संभावित टकराव को लेकर चिंतित थे.

सुबह के कारोबार में स्थिति काफी तनावपूर्ण नजर आई. तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते कीमतों में उछाल आया और ब्रेंट क्रूड करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इसी तरह, डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी शुरुआती तेजी देखी गई, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रहा.

कच्चे तेल की कीमत में गिरावट

हालांकि, दिन ढलते-ढलते तस्वीर बदल गई. शाम करीब 5:30 बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 100.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जो करीब 6.2 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है. यह गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार ने हालिया कूटनीतिक संकेतों को सकारात्मक रूप में लिया है, हालांकि दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

दरअसल, शुरुआती तेजी की बड़ी वजह ट्रंप की वह चेतावनी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान ने अहम वैश्विक तेल मार्ग Strait of Hormuz को नहीं खोला, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई कर सकता है. इस बयान से बाजार में घबराहट फैल गई थी और कीमतें तेजी से ऊपर चली गई थीं.

 ट्रंप का नरम रुख 

लेकिन बाद में ट्रंप का रुख नरम पड़ता नजर आया. उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच “बेहद सकारात्मक और सार्थक” बातचीत हुई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन वार्ताओं का उद्देश्य मध्य पूर्व में जारी तनाव का व्यापक और स्थायी समाधान निकालना है.

इसी कूटनीतिक पहल के तहत अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढांचे और बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया है. हालांकि, यह फैसला पूरी तरह से आने वाले दिनों में वार्ता की प्रगति पर निर्भर करेगा.

फिलहाल, वैश्विक निवेशकों की नजरें अमेरिका-ईरान बातचीत पर टिकी हुई हैं. यदि वार्ता आगे भी सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. वहीं, किसी भी तरह की रुकावट या नए तनाव की स्थिति में कीमतों में फिर से तेज उछाल आने की संभावना बनी हुई है.

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