ईरान-इजरायल जंग से भारत में छाया तेल संकट! इंडिया के पास अब 50 दिनों का तेल भंडार, जानें डीजल-पेट्रोल की कीमतों में होगी बढ़ोतरी?

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण भारत को कच्चे तेल की कमी बढ़ती जा रही है. IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है, जिसके कारण तेल टैंकरों का आवागमन रुक गया है

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला किया जा सकता है. 

इस वजह से तेल टैंकरों का आवागमन रुक गया है और वैश्विक तेल की कीमतों में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 79-82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी ऊपर चढ़ा है.

भारत के पास 25 दिनों का पर्याप्त भंडार

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन (जैसे पेट्रोल, डीजल) का भंडार लगभग 50 दिनों की जरूरत के लिए उपलब्ध है. इसमें रिफाइनरी में रखा तेल, रणनीतिक भंडार और रास्ते में आने वाले जहाजों का स्टॉक शामिल है.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले भी कहा था कि देश अल्पकालिक बाधाओं से निपटने के लिए तैयार है. सरकार ने नागरिकों को आश्वासन दिया है कि ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है और कोई तत्काल कमी नहीं होगी.

वैकल्पिक स्रोतों की तलाश 

सरकार अब कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के आयात के लिए नए देशों और मार्गों की तलाश कर रही है. भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविधता दे रहा है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ज्यादा निर्भरता न रहे.

कई अन्य स्रोतों से तेल आ रहा है. मंत्रालय ने 24 घंटे नियंत्रण कक्ष बनाया है, जहां ईंधन की आपूर्ति और भंडार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. स्थिति को "संतोषजनक" बताया गया है.

पेट्रोल-डीजल कीमतों में कोई बदलाव नहीं

सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है. उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है.

अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन अभी चिंता की कोई बात नहीं है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, लेकिन पिछले वर्षों में आपूर्ति स्रोतों को बढ़ाने से जोखिम कम हुआ है.

भारत सरकार सतर्क

ताहोर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, इसलिए लंबा संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. भारत सरकार सतर्क है और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.

उम्मीद है कि जल्द ही क्षेत्र में शांति आएगी और तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी. नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है.

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