काराकाट की हार के बाद राज्यसभा जाने की तैयारी में उपेंद्र कुशवाहा...नितिन नवीन के साथ करेंगे नामांकन

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए NDA ने उपेंद्र कुशवाहा को अपना पांचवां उम्मीदवार बनाकर सियासी हलचल बढ़ा दी है. काराकाट से हारने के बाद उनकी उच्च सदन में वापसी के लिए अब यही एकमात्र सहारा है. इस बात की घोषणा खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने की है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

पटना : बिहार की राजनीति में एक बार फिर से राज्यसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त सरगर्मी तेज हो गई है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के लिए राज्यसभा में दोबारा वापसी का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो चुका है. वे एनडीए गठबंधन की ओर से पांचवें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे. भाजपा ने मंगलवार को नितिन नवीन और शिवेश राम के साथ उनके नाम का भी आधिकारिक ऐलान कर दिया है. कुशवाहा 5 मार्च को अपना नामांकन दाखिल करेंगे.

संशय के बाद कुशवाह को मिली हरी झंडी

आपको बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की इस उम्मीदवारी को लेकर लंबे समय से संशय के बादल मंडरा रहे थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट से हार मिलने के बाद यह चर्चा तेज थी कि भाजपा उन्हें दोबारा मौका नहीं देगी. कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा उनकी पार्टी के विलय की शर्त रख सकती है या उनके बेटे को एमएलसी बना सकती है. लेकिन दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद अंततः उनके नाम पर मुहर लग गई और सभी पुरानी अटकलें पूरी तरह शांत हुईं.

1 सीट जितने के लिए 41 विधायकों की जरूरत 

बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 41 विधायकों के वोट की जरूरत है. एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं. जिनमें भाजपा के 89 और जदयू के 85 विधायक शामिल हैं. इस संख्या बल के आधार पर एनडीए चार सीटों पर तो बहुत ही आसानी से अपनी जीत पक्की कर लेगा. लेकिन पांचवीं सीट पर उपेंद्र कुशवाहा की राह उतनी आसान नहीं है. क्योंकि यहाँ थोड़े अतिरिक्त समर्थन की दरकार होगी.

पांचवीं सीट पर फंसा पेंच 

एनडीए की चार सीटें तो सुरक्षित हैं. जिनमें दो भाजपा और दो जदयू के कोटे की मानी जा रही हैं. लेकिन पांचवीं सीट को जीतने के लिए एनडीए को विपक्षी खेमे के तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है. दूसरी ओर. विपक्षी दल आरजेडी ने भी इस पांचवीं सीट के लिए अपना प्रत्याशी उतारने का स्पष्ट ऐलान कर दिया है. जिससे अब मुकाबला पूरी तरह से रोमांचक और कांटे का हो गया है. यहाँ जीत और हार का अंतर बेहद मामूली रहने वाला है.

क्रॉस वोटिंग की बढ़ती संभावना

जब मुकाबला इतना करीबी होता है. तो अक्सर विधानसभा में क्रॉस वोटिंग के आसार बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं. एनडीए के रणनीतिकार विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि उपेंद्र कुशवाहा की जीत सुनिश्चित की जा सके. आरजेडी और उसके सहयोगियों के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है. 16 मार्च को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि विपक्षी एकता में कितनी दरार है और एनडीए की रणनीति कितनी सफल रही.

नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च 

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है. इसी दिन उपेंद्र कुशवाहा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ पटना में अपना पर्चा भरेंगे. इसके बाद पूरी चुनावी प्रक्रिया 16 मार्च को मतदान के साथ संपन्न होगी. राज्य की राजनीति के लिए यह चुनाव न केवल प्रतिष्ठा का विषय है. बल्कि इससे आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी बड़े सियासी संदेश निकलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है.

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