Edible Oil Prices: सरसों, मूंगफली समेत कई खाने के तेल हो गए सस्ते, जानें आज का लेटेस्ट प्राइस
Edible Oil Prices: तेल-तिलहन बाजार में इस सप्ताह खाद्य तेलों की कीमतों में कमी देखने को मिली है. सरसों, सोयाबीन और मूंगफली तेल के दाम घटे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है. खासतौर पर सोयाबीन का भाव अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 15 प्रतिशत कम है, जो बाजार में कीमतों के दबाव को दर्शाता है.

Forward Trading: तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सोयाबीन, सरसों और मूंगफली तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. वायदा कारोबार में बिनौला खल के दाम तोड़े जाने का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया. इसी कारण कुछ तेलों के दाम में सुधार भी देखा गया.
सरसों, मूंगफली और सोयाबीन तेल के दाम में गिरावट
आपको बता दें कि सोमवार को देश के तेल-तिलहन बाजार में सरसों, मूंगफली और सोयाबीन तिलहन की कीमतों में गिरावट देखी गई. हालांकि, मूंगफली और सोयाबीन तेल के दाम में सुधार हुआ. वहीं, सरसों तेल के दाम पूर्वस्तर पर ही बंद हुए. शिकागो एक्सचेंज बंद होने और मलेशिया एक्सचेंज में मामूली सुधार से घरेलू बाजार पर कोई खास असर नहीं पड़ा.
वायदा कारोबार से किसानों को नुकसान?
सूत्रों का कहना है कि वायदा कारोबार में सट्टेबाजों ने बिनौला खल का दाम तीन-चार साल पुराने स्तर पर ला दिया. बिनौला खल के दाम तोड़ने से अन्य खाद्य तेलों पर भी दबाव पड़ा. किसानों का मानना है कि वायदा कारोबार में सट्टेबाजों द्वारा दाम कम करने से उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता.
सोयाबीन एमएसपी से 15% नीचे बिक रहा
बता दें कि सोयाबीन फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से करीब 15% कम कीमत पर बिक रहा है. आयातित सोयाबीन डीगम तेल, जो पहले लागत से पांच रुपये प्रति किलो कम था, अब तीन रुपये प्रति किलो कम दाम पर बिक रहा है. इसी वजह से सोयाबीन तेल के दाम में थोड़ा सुधार देखा गया.
तेल-तिलहनों के मौजूदा भाव
- सरसों तिलहन: ₹6,500-₹6,550 प्रति क्विंटल
- मूंगफली: ₹5,900-₹6,225 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन दाना: ₹4,350-₹4,400 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन तेल मिल डिलीवरी (दिल्ली): ₹13,600 प्रति क्विंटल
- पामोलिन आरबीडी (दिल्ली): ₹14,050 प्रति क्विंटल
वायदा कारोबार का असली चेहरा
वहीं आपको बता दें कि सूत्रों के मुताबिक, वायदा कारोबार में बिनौला खल का स्टॉक मात्र 45,000 टन है, जबकि 60,000 टन के सौदे किए जा चुके हैं. स्टॉक की कमी के बावजूद फसल आने के समय जानबूझकर दाम तोड़ने से पूरे तेल-तिलहन उद्योग की कारोबारी धारणा पर नकारात्मक असर पड़ता है.


