1 मई से महंगा हुआ दूध! तीन राज्यों में बढ़े दाम, जेब पर असर तय
1 मई से ओडिशा, केरल और पंजाब में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जिससे पशुपालकों को राहत मिलेगी. यह फैसला बढ़ती लागत को देखते हुए लिया गया है, जिससे डेयरी किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.

देश में रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल दूध की कीमतों को लेकर अहम बदलाव सामने आया है. 1 मई से कुछ राज्यों में दूध के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ पशुपालकों पर भी इसका असर पड़ेगा. यह फैसला मुख्य रूप से बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि डेयरी से जुड़े किसानों को राहत मिल सके.
ओडिशा में कितनी कीमत बढ़ी?
जिन राज्यों में दूध की कीमतों में इजाफा हुआ है, उनमें ओडिशा, केरल और पंजाब शामिल हैं. ओडिशा में ओडिशा राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने दूध खरीद दर में 1 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है. इसके बाद अब किसानों को प्रति लीटर ₹39.05 का भुगतान किया जाएगा, जो पहले ₹38.05 था. इस बढ़ोतरी का उद्देश्य दूध उत्पादकों की आय में सुधार करना है.
वहीं केरल में केरल सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ ने दूध के दाम में 4 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. हालांकि, यह नई दरें तुरंत लागू नहीं हुई हैं और संभावना जताई जा रही है कि 20 मई के बाद इन्हें लागू किया जाएगा. इस फैसले से राज्य के डेयरी किसानों को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है.
पंजाब की बात करें तो यहां की प्रमुख डेयरी संस्था पंजाब राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने दूध की खरीद कीमत में फैट के आधार पर वृद्धि की है. नए फैसले के तहत प्रति किलो फैट पर 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. चूंकि अधिकांश डेयरी कंपनियां दूध की गुणवत्ता यानी फैट कंटेंट के आधार पर ही भुगतान करती हैं. इसलिए इसका सीधा फायदा पशुपालकों को मिलेगा. पंजाब में यह नई दरें 1 मई से ही लागू कर दी गई हैं.
कीमतों में संशोधन का फैसला क्यों लिया गया?
दरअसल, पिछले कुछ समय से पशुओं के चारे, दवाइयों और रखरखाव की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इससे पशुपालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था और वे लंबे समय से दूध के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे थे. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों और सहकारी संस्थाओं ने कीमतों में संशोधन का फैसला लिया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि दूध के दाम बढ़ने से जहां एक ओर उपभोक्ताओं पर हल्का असर पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है. डेयरी क्षेत्र में काम करने वाले किसानों की आय बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है, जो कृषि और पशुपालन क्षेत्र के विकास में सहायक साबित होगा.


