'महाकुंभ में पहुंचे मुकेश अंबानी – आस्था की लहर में अंबानी परिवार ने लगाई पुण्य की डुबकी!'

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है. इसी बीच देश के बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी अपने परिवार के साथ संगम नगरी पहुंचे. लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में बड़ी हस्तियां भी पुण्य की डुबकी लगा रही हैं. इस बार का महाकुंभ कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है—आखिर क्या है इसकी खासियत और कितने करोड़ लोग अब तक संगम में डुबकी लगा चुके हैं? जानिए पूरी खबर!

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Edited By: Aprajita

Mahakumbh 2025: प्रयागराज में इस समय महाकुंभ का भव्य आयोजन चल रहा है और दुनियाभर से श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं. इसी बीच देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपने परिवार के साथ प्रयागराज पहुंचे. उनके साथ बेटे अनंत अंबानी और अन्य परिवार के सदस्य भी मौजूद थे.

अरैल घाट पहुंचे अंबानी परिवार

अंबानी परिवार प्रयागराज पहुंचने के बाद सीधे अरैल घाट जाएगा, जो त्रिवेणी संगम के पास स्थित है. यह घाट अपनी शांति और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है, जहां से नैनी ब्रिज और घाट के आसपास के मंदिरों के मनमोहक दृश्य देखने को मिलते हैं.

गौतम अडानी के भाई भी पहुंचे अयोध्या

मुकेश अंबानी से पहले अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी अपनी पत्नी रंजनबेन अडानी के साथ अयोध्या पहुंचे. अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इन दिनों भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं.

45 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की बेमिसाल भीड़ देखने को मिल रही है. उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक, अब तक 45 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर चुके हैं. मंगलवार सुबह तक ही 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगा में पवित्र डुबकी लगा चुके थे.

महाकुंभ में शामिल हुए दिग्गज नेता

महाकुंभ के इस आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता और मंत्री संगम में डुबकी लगा चुके हैं.

26 फरवरी तक चलेगा महाकुंभ

महाकुंभ 13 जनवरी 2025 (पौष पूर्णिमा) से शुरू हुआ और 26 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक चलेगा. यह 144 सालों में पहली बार इतना भव्य रूप ले चुका है. अनुमान लगाया जा रहा है कि अंतिम स्नान पर्व तक श्रद्धालुओं की संख्या 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है. यह महाकुंभ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सनातन परंपरा की एक झलक भी दिखाता है. दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम में करोड़ों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं.

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