क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? LPG और LNG को लेकर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उठी आशंकाओं के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं. कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की वैश्विक कीमतों में उछाल के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि फिलहाल देश में ईंधन आपूर्ति सामान्य है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है. कच्चे तेल, एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल देखा जा रहा है, जिससे भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है.
हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल ईंधन आपूर्ति सामान्य है और किसी तरह की तत्काल कमी की आशंका नहीं है. सरकार का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
भारत में कितना है ईंधन का स्टॉक?
सरकार के अनुसार देश में करीब 25 दिनों के लिए पेट्रोल और डीज़ल का भंडार मौजूद है, जबकि लगभग आठ सप्ताह का कच्चे तेल का स्टॉक उपलब्ध है. इसके अलावा, एलपीजी और एलएनजी का भी लगभग 25 दिनों का भंडार देश में मौजूद है.
सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से जारी है. हालांकि, अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है.
तत्काल नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकार ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला जाएगा.
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "कीमतों में वृद्धि को उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा. पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर रहेंगी."
इस बयान के बाद आम लोगों को राहत मिली है कि अभी ईंधन की कीमतों में इजाफे की संभावना नहीं है.
LPG को लेकर क्यों ज्यादा चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की तुलना में रसोई गैस को लेकर ज्यादा चिंता की स्थिति बन सकती है. भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत एलपीजी खाड़ी देशों, विशेषकर कतर से आयात करता है, और यह आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है.
इसके अलावा, देश में एलपीजी का कोई रणनीतिक भंडार नहीं है. वहीं, एलएनजी की करीब 60 प्रतिशत जरूरत भी आयात के जरिए पूरी की जाती है. ऐसे में होर्मुज मार्ग बाधित होने की स्थिति में रसोई गैस की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है.
वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू
सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर दिए हैं. पिछले वर्ष दिसंबर में भारत ने अमेरिका के साथ एलपीजी आयात का समझौता किया था.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार रूस के साथ-साथ पश्चिमी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा रही है. इसके अलावा अमेरिका और कनाडा से एलपीजी आयात की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
वैश्विक स्तर पर बढ़ सकता है संकट
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध आठ-दस दिन में समाप्त नहीं हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है. उनका मानना है कि ऐसी परिस्थिति में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें आसमान छू सकती हैं और आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे पूरी दुनिया को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
कई देशों से आयात करता है भारत
भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद करता है. सरकार के मुताबिक, देश का केवल 40 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जबकि शेष 60 प्रतिशत अन्य मार्गों से आता है.
भारत रूस से भी पूर्व समझौतों के तहत कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे आपूर्ति में विविधता बनी हुई है.
कंट्रोल रूम स्थापित: पुरी
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने जानकारी दी कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और स्टॉक की निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है.
उन्होंने कहा, "उपभोक्ताओं के हित सरकार के सर्वोपरि हैं." मंत्रालय का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते कदम उठाए जाएंगे.
होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो बढ़ेगी मुश्किल
ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष आरएस शर्मा ने कहा, "यह बेहद अप्रत्याशित स्थिति है." उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में तनाव से कीमतों में उछाल से ज्यादा गंभीर असर होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पड़ेगा, क्योंकि भारत के तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. एलएनजी आयात का दो-तिहाई हिस्सा भी इसी रास्ते से आता है.
लड़ाई लंबी नहीं चलेगी
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा का मानना है, "यह लड़ाई आठ-दस दिन के अंदर अपने अंजाम तक पहुंच जाएगी."
उनके मुताबिक, अगर युद्ध जल्द खत्म हो जाता है तो बढ़ी हुई कीमतें फिर सामान्य हो सकती हैं, लेकिन यदि संघर्ष लंबा चला तो कीमतों और आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ेगा.
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है. वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. दुनिया के कुल तेल और गैस प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होता है.
यदि यह मार्ग बंद होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है.
भारत और दुनिया के लिए क्या मायने?
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और यह आपूर्ति मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है.
यदि यह मार्ग बाधित होता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर त्वरित असर पड़ेगा. तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई और राजकोषीय दबाव बढ़ेगा. साथ ही आयात बिल में वृद्धि से चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है.


