रंगों के साथ स्वाद का तड़का... होली पर जरूर बनाएं ये पारंपरिक पकवान, हर उम्र की पहली पसंद
होली के अवसर पर घरों में खुरमी, बटरी, सुरहा, मालपुआ और नमकीन सेव जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं. गुड़ और आटे से बने ये व्यंजन स्वादिष्ट, हल्के और पाचक होते हैं, जो त्योहार की खुशी को और बढ़ा देते हैं.

रंगों की बौछार, ढोल की थाप और अपनों के साथ हंसी-ठिठोली, होली का त्योहार सिर्फ रंगों का नहीं बल्कि स्वाद का भी उत्सव है. इस दिन घर-घर में ऐसे पारंपरिक पकवान बनते हैं, जिनके बिना होली अधूरी मानी जाती है. जैसे ही त्योहार करीब आता है, रसोई से घी और गुड़ की खुशबू आने लगती है और परिवार के लोग मिलकर खास व्यंजन तैयार करने में जुट जाते हैं.
होली के मौके पर कई तरह के मीठे और नमकीन स्नैक्स बनाए जाते हैं. आटे की मीठी खुरमी, बटरी, गुजिया, पपड़ी, सुरहा और मालपुआ जैसे व्यंजन इस त्योहार की पहचान हैं. इन पकवानों की खास बात यह है कि इन्हें घर में आसानी से तैयार किया जा सकता है और ये बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आते हैं.
आटा, बेसन, पालक और गुड़ या शक्कर से बनने वाली पपड़ी और खुरमी स्वाद के साथ-साथ हल्की भी होती हैं. यही कारण है कि इन्हें खाने के बाद भारीपन महसूस नहीं होता. त्योहार के दौरान बाजार से नमकीन लाने की जरूरत भी नहीं पड़ती, क्योंकि ये सभी चीजें घर पर ही तैयार हो जाती हैं.
सुरहा और मालपुआ बनाने की परंपरा
कुछ क्षेत्रों में होली पर सुरहा और गुड़ के मालपुए बनाने की खास परंपरा है. सुरहा तैयार करने के लिए गेहूं के आटे और गुड़ का उपयोग किया जाता है. पहले गुड़ का सीरा बनाया जाता है, फिर उसी सीरे से आटा गूंधा जाता है. इस प्रक्रिया में अलग से पानी डालने की जरूरत नहीं होती.
गूंधे हुए आटे से छोटे-छोटे टुकड़े काटकर सुरहा तैयार किए जाते हैं. मालपुआ बनाते समय हाथों से सुंदर डिजाइन भी बनाई जाती है, जिससे यह देखने में आकर्षक लगे. इन्हें सरसों के तेल में तला जाता है, हालांकि चाहें तो घी में भी बनाया जा सकता है. ठंडा होने पर ये और ज्यादा कुरकुरे और स्वादिष्ट हो जाते हैं.
नमकीन और मीठे का संतुलन
होली पर सिर्फ मीठे ही नहीं, बल्कि नमकीन व्यंजन भी बनाए जाते हैं. अजवाइन वाली बटरी और बेसन की नमकीन सेव खास तौर पर पसंद की जाती है. आटे और गुड़ से बनी मीठी खुरमी भी त्योहार का अहम हिस्सा है. ये पकवान लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और चाय या कॉफी के साथ भी खाए जा सकते हैं.
स्वाद के साथ सेहत का ध्यान
इन पारंपरिक व्यंजनों की एक खास बात यह भी है कि ये गुड़ से बनाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है. ये हल्के और पाचक होते हैं, इसलिए त्योहार में बार-बार खाने पर भी परेशानी नहीं होती. अगर अचानक भूख लग जाए तो ये स्नैक्स तुरंत काम आ जाते हैं. होली के रंगों के साथ जब इन पकवानों का स्वाद जुड़ता है, तो त्योहार की खुशी दोगुनी हो जाती है. यही कारण है कि आज भी लोग इन परंपरागत व्यंजनों को बनाकर अपने परिवार के साथ होली का आनंद लेते हैं.


