Delhi Assembly Elections 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है, लेकिन भाजपा की रणनीति इस बार अलग नजर आ रही है. पहली बार भाजपा चाहती है कि कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़े. अंदरखाने भाजपा का मानना है कि कांग्रेस के उभरने से आप को नुकसान होगा, जिसका सीधा फायदा उसे मिल सकता है.
दिल्ली की राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस का कमजोर होना भाजपा के लिए हमेशा चुनौती रहा है. ऐसे में इस बार भाजपा रणनीतिक तौर पर कांग्रेस को मजबूत देखना चाहती है ताकि वोटों का बंटवारा उसे फायदा पहुंचा सके.
भाजपा के रणनीतिकार 1993 के विधानसभा चुनाव की ओर देख रहे हैं, जब वोटों के बंटवारे ने भाजपा को सत्ता तक पहुंचाया था. उस वक्त जनता दल ने 12% से ज्यादा वोट हासिल किए थे, जिससे कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटकर 35% पर आ गया था और भाजपा 43% वोट हासिल कर नंबर-1 बन गई थी. इस बार भी भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी का ग्राफ गिरेगा.
कांग्रेस का पिछले तीन विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन कमजोर रहा है, लेकिन इस बार उसने लोकसभा चुनाव में बने 'इंडिया गठबंधन' की परवाह किए बिना अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. संदीप दीक्षित और अलका लांबा जैसे दिग्गज उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने यह साफ संकेत दिया है कि वह आम आदमी पार्टी से कोई नरमी नहीं दिखाने वाली.
पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत जरूर बढ़ा है, लेकिन यह सीटों में तब्दील नहीं हो पाया.
- 2013 में भाजपा को 33.07% वोट मिले थे और उसने 28 सीटें जीती थी.
- 2015 में वोट प्रतिशत 32% रह गया और सीटें घटकर 3 रह गईं.
- 2020 में भाजपा ने 38.51% वोट हासिल किए, लेकिन सीटें सिर्फ 8 आईं.
-वहीं, आप का वोट प्रतिशत लगातार 50% के ऊपर बना हुआ है.
भाजपा का आकलन है कि कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन सीधे आम आदमी पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा. कांग्रेस के कमजोर होने से आप का वोट बैंक मजबूत हुआ है, जिसे भाजपा इस बार रोकना चाहती है.
भाजपा दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए इस बार कांग्रेस को अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है। पार्टी की योजना है कि कांग्रेस के वोट काटने से आप का वोट प्रतिशत घटे और भाजपा सत्ता के करीब पहुंच सके. First Updated : Sunday, 19 January 2025