आखिरकार देश के सबसे पुराने केस का हुआ निपटारा, 72 साल बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में उस केस का निपटारा किया है, जो कि साल 1951 से फैसले की राह ढूंढ रहा था। दरअसल, ये केस कोर्ट में जिस वक्त फाइल हुआ था, उसके पूरे एक दशक बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्रीवास्तव खुद जन्मे थे। अब आप इस मुकदमें की उम्र से इस मामले की नज़ाकत समझिए।

Yashodhara Virodai

तारीख पे तारीख... वैसे तो ये एक फिल्मी डायलॉग है पर असल में ये भारतीय न्याय व्यवस्था का बड़ा सच भी बयां करता है। क्योंकि आकड़ों की माने तो देश की अदालतों में आज की तारीख में तकरीबन 4 करोड़ से अधिक केस लंबित हैं। इनमें कई सारें मामलों का निपटारा होते-होते तो दशकों लग जाते हैं... जैसा कि अब देश के सबसे पुराने केस का 72 साल बाद निपटारा हुआ है।

कलकत्ता हाई कोर्ट में साल 1951 में दर्ज हुआ था मुकदमा

जी हां, बता दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में उस केस का निपटारा किया है, जो कि साल 1951 से फैसले की राह ढूंढ रहा था। दरअसल, ये केस कोर्ट में जिस वक्त फाइल हुआ था, उसके पूरे एक दशक बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्रीवास्तव खुद जन्मे थे। अब आप इस मुकदमें की उम्र से इस मामले की नजाकत समझिए। दरअसल, ये मामला कोलकाता के बरहामपुर बैंक लिमिटेड के लिक्विडेशन का था, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट ने 19 नवंबर 1948 को बैंक को दिवालिया घोषित कर बंद करने का आदेश दिया था। पर उसके बाद बैंक को बंद करने के इस आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका 1 जनवरी, 1951 को कोर्ट में केस संख्या 71/1951 के रूप में दर्ज की गई।

जस्टिस रवि कृष्ण के फैसले से 7 दशक पुराने मुकदमेबाजी से मिली निजात

वहीं 7 दशक बाद कलकत्ता हाई कोर्ट जस्टिस रवि कृष्ण कपूर ने बीते साल 19 सितंबर को केस के निपटारे के आदेश पर हस्ताक्षर किया और उनके इस फैसले को सील कर टाइपोग्राफिकल सुधार के साथ लिए दिया गया था। फिलहाल बेरहामपुर बैंक लिमिटेड को बंद करने की कार्यवाई के साथ ही इस केस का निपटारा हो चुका है।

वैसे आपको बता दें किआज की तारीख में देश में 5 ऐसे केस पर फैसला आना बाकी है, जोकि 71 साल पहले 1952 में फाइल किए गए थे। मालूम हो कि इनमें से दो सिविल केस जहां बंगाल के मालदा में पेंडिंग हैं, तो वहींएक केस मद्रास हाई कोर्ट में फैसले की आस में सालों से पड़ा हुआ है। गौरतलब है कि मालदा कोर्ट ने इन मामलों के लिए मार्च और नवंबर में सुनवाई रखी है। ऐसे में इस केस के निपटारे के साथ ही देश को 7 दशक पुराने मुकदमेबाजी से मुक्ति मिल जाएगी।

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