जब तक मैं सत्ता में रहूंगा, मियां लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी...जानें कार्यक्रम के दौरान मीडिया से ऐसा क्यों बोले CM हिमंत सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ‘मियां’ समुदाय पर विवादित बयान दिया, कहा कि जब तक वे सत्ता में हैं, इन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी. उन्होंने इन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी बताया और कहा कि इन्हें राज्य छोड़ने के लिए दबाव जरूरी है. विपक्ष ने इसे सांप्रदायिक और मतदाता सूची के दुरुपयोग का मामला बताया है.

नई दिल्ली : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में बेहद विवादास्पद बयान दिया. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक वे सत्ता में रहेंगे, ‘मियां’ लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. उनके अनुसार, इन लोगों को राज्य छोड़ने के लिए लगातार दबाव और सख्ती आवश्यक है. मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा, “अगर मैं असम में सत्ता में रहा तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. वे यहां शांति से नहीं रह सकते. जब तक हम उनके लिए मुश्किलें खड़ी नहीं करेंगे, वे राज्य नहीं छोड़ेंगे.”
‘मियां’ शब्द का विवादास्पद इतिहास
बांग्लादेश से आए लोग यहां कैसे काम कर सकते हैं?
अपने पूर्व के एक बयान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उन्होंने पहले कहा था कि अगर कोई ‘मियां’ रिक्शा चालक 5 रुपये किराया मांगे तो उसे 4 रुपये देना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि यह बात उन्होंने उनके ‘फायदे’ के लिए कही थी. सरमा के अनुसार, “किसी देश का नागरिक अपने देश में काम कर सकता है. बांग्लादेश से आए लोग यहां कैसे काम कर सकते हैं?” उन्होंने आगे कहा कि अगर वे उनकी भलाई की बात भी स्वीकार नहीं करते, तो फिर उन्हें उनके खिलाफ ही काम करना पड़ेगा.
बांग्लादेशी मुसलमान असम की आबादी का 40 प्रतिशत
मुख्यमंत्री सरमा ने पहले भी कई विवादास्पद दावे किए हैं. उनके अनुसार, अगली जनगणना तक बांग्लादेशी मुसलमान असम की आबादी का 40 प्रतिशत हो सकते हैं. उन्होंने ‘मियां’ समुदाय पर आरोप भी लगाए हैं. जैसे-असम में जमीन पर अवैध कब्जा, ‘लव जिहाद’ में संलिप्तता, ‘फर्टिलाइजर जिहाद’ का आरोप.
विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की...
मुख्यमंत्री के इन बयानों पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. असम के विपक्ष के नेता देबबरत सैकिया ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मतदाता सूची के विशेष संशोधन के दुरुपयोग का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया है. सैकिया ने अपने पत्र में लिखा है, “यह स्थिति प्रशासनिक अनियमितता के दायरे से परे जाकर एक संवैधानिक संकट का रूप ले चुकी है, जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का आधार) के तहत मतदान के अधिकार को कार्यकारी हस्तक्षेप, सांप्रदायिक लक्ष्यीकरण और वैधानिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग के माध्यम से व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है.”
आलोचनाओं के बीच मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण
अपने बयान पर आई आलोचनाओं के बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने “मियां” या “मियान” शब्द का उपयोग असम में बांग्लादेशी मुस्लिम अवैध प्रवासन के संदर्भ में किया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक टिप्पणी का हवाला भी दिया जिसमें “असम के जनसांख्यिकीय आक्रमण” का उल्लेख है.
सरकार धर्म या भारतीय नागरिक के खिलाफ नहीं
सरमा ने कहा, “जब देश का सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय ‘जनसांख्यिकीय आक्रमण’ जैसे शब्दों का उपयोग करता है और क्षेत्र और राष्ट्रीय एकता के संभावित नुकसान की चेतावनी देता है, तो उस वास्तविकता को स्वीकार करना न तो नफरत है, न सांप्रदायिकता, और न ही किसी समुदाय पर हमला है. यह एक गंभीर और लंबे समय से चली आ रही समस्या की पहचान है जिसके साथ असम दशकों से जी रहा है.” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी धर्म या भारतीय नागरिक के खिलाफ नहीं है और केवल असम की पहचान, सुरक्षा और भविष्य की रक्षा करने का प्रयास कर रही है.


