बजट 2026 में किसानों, युवाओं, उद्योगों और राज्य की आर्थिकता के लिए कोई राहत नहीं: CM भगवंत मान

केंद्रीय बजट 2026-27 पर पंजाब सरकार और आप नेताओं ने तीव्र नाराजगी जताई है. सीएम भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल चीमा, कृषि मंत्री गुरमीत खुडियां समेत कई नेताओं ने इसे पंजाब के किसानों के साथ बड़ा धोखा बताया. एमएसपी की कानूनी गारंटी, फसल विविधीकरण, बाढ़ राहत, रोजगार सृजन और राज्य के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स का अभाव होने से इसे भेदभावपूर्ण करार दिया गया. पंजाब को लगातार अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य अपने दम पर मजबूत बनेगा.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

पंजाब : केंद्रीय बजट 2026-27 पर पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें इसे राज्य की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा न उतरने वाला और पंजाब के साथ भेदभावपूर्ण बताया गया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि बजट में किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कोई कानूनी गारंटी नहीं दी गई, युवाओं के लिए रोजगार सृजन का कोई ठोस भरोसा नहीं है और उद्योगों या कर प्रणाली में कोई राहत का प्रावधान नहीं किया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने पंजाब की आर्थिक मजबूती के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया, जिससे राज्य और यहां के लोगों के साथ एक बार फिर अन्याय हुआ है. मान ने जोर देकर कहा कि पंजाबी मेहनती और जज्बे से भरे लोग हैं, केंद्र की लगातार अनदेखी के बावजूद आप सरकार और प्रदेशवासी एकजुट होकर अपने प्रयासों से राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे.

बजट में किसानों के लिए कुछ भी नहीं... 
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बजट को पंजाब और हरियाणा के किसानों के प्रति धोखा करार दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र एमएसपी से मुंह मोड़ रहा है और कृषि बाजार तथा खेती के बुनियादी ढांचे की जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है. चीमा ने बताया कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में कोई वृद्धि नहीं हुई और मार्केट सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कोई ठोस सहायता नहीं दी गई, जिससे कृषि प्रधान राज्यों को अकेला छोड़ दिया गया.

उन्होंने आलोचना की कि बजट में नारियल, काजू, चंदन और सूखे मेवे जैसी फसलों को बढ़ावा देने का जिक्र है, लेकिन उत्तर भारत के किसानों की मौसमी फसलों के लिए कुछ नहीं है. चीमा ने इसे केंद्र की भेदभावपूर्ण नीति का प्रमाण बताया, जहां पंजाब के किसान देश का पेट भरते हैं, फिर भी उन्हें निवेश और सम्मान नहीं मिल रहा.

बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए कोई राहत नहीं...
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने बजट को बड़ी निराशा करार दिया, जिसमें एमएसपी का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है, फसल विविधीकरण के लिए सहायता पैकेज का अभाव है और बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए कोई राहत नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि पंजाब के अन्नदाता होने के बावजूद केंद्र ने उनकी मुश्किलों को अनदेखा किया और खोखले वादों से मुंह मोड़ लिया. खुडियां ने जोर दिया कि पंजाब के किसान सच्ची सहायता और निष्पक्ष नीतियों के हकदार हैं, न कि लगातार उपेक्षा के.

भाजपा ने पंजाब के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार किया 
मंत्री अमन अरोड़ा ने बजट को लोगों के लिए निराशा लेकर आने वाला बताया और आरोप लगाया कि भाजपा ने पंजाब के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार जारी रखा है. उन्होंने कहा कि आजादी से लेकर देश की सुरक्षा तक पंजाब के योगदान के बावजूद राज्य के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट या विशेष प्रावधान नहीं किया गया. अरोड़ा ने केंद्र से भेदभाव बंद करने की अपील की और याद दिलाया कि पंजाब देश का अभिन्न हिस्सा है, जिसे सम्मान और उचित सहायता का हक है.

आप के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने बजट को पंजाब के साथ खुला भेदभाव बताया, जिसमें न एमएसपी गारंटी है, न रोजगार का भरोसा और न ही कोई बड़ा प्रोजेक्ट. उन्होंने पंजाब की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र फंड रोककर और जरूरतों को अनदेखा करके राज्य को उसका हक नहीं दे रहा. धालीवाल ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की कड़ी आलोचना की और इसे दुखद बताया.

बजट में किसान, युवा और आम लोगों को निराशा मिली
मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर और लाल चंद कटारुचक ने भी किसानों के अधिकारों से वंचित रखने की बात कही, जहां एमएसपी, फसल विविधीकरण या आपदा राहत के लिए कोई गंभीर प्रावधान नहीं है. उन्होंने इसे किसान विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया.

डॉ. रवजोत ने स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में पंजाब की अनदेखी पर सवाल उठाए, जबकि नील गर्ग ने बजट की तुलना "पटिया पहाड़, निकलेआ चूहा" से की, जहां बड़े दावों के बावजूद पंजाब, किसान, युवा और आम लोगों को निराशा मिली. गर्ग ने आरोप लगाया कि बजट बड़े कॉर्पोरेट्स के पक्ष में है और महंगाई से जूझते लोगों को कोई राहत नहीं दी गई. कुल मिलाकर, पंजाब सरकार ने बजट को राज्य विरोधी और खोखला करार दिया, जिसमें किसानों की मुख्य मांगें अनसुनी रह गईं. 

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