सरकार के इशारे पर आपने बोलने नहीं दिया...ओम बिरला को राहुल गांधी ने लिखा पत्र, कहा- यह लोकतंत्र पर काला धब्बा

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार के इशारे पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने से रोक दिया गया हो. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है. 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : लोकसभा में मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर उन्हें सदन में बोलने से रोका जा रहा है, जो लोकतंत्र पर काला धब्बा है. राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित लेख का हवाला देकर 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने अनुमति नहीं दी. सोमवार की तरह मंगलवार को भी उन्हें रोका गया, जबकि उन्होंने स्पीकर के निर्देश पर लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रख दिया था.

आज संसद में नियमों का खुला उल्लंंघन हुआ 

आपको बता दें कि पत्र में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि सदन की लंबे समय से चली आ रही परंपरा और पूर्व स्पीकरों के फैसलों के मुताबिक, किसी सदस्य को दस्तावेज का जिक्र करने के लिए पहले उसे सत्यापित करना होता है और सामग्री की जिम्मेदारी लेनी पड़ती है. यह शर्त पूरी होने पर स्पीकर को अनुमति देनी चाहिए, फिर सरकार को जवाब देना होता है और स्पीकर की भूमिका खत्म हो जाती है. उन्होंने कहा कि आज यह परंपरा तोड़ी गई और उन्हें बोलने से रोका गया, जो संसदीय नियमों का खुला उल्लंघन है.

सरकार, संसद में विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है...
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का प्रमुख हिस्सा थी, जिस पर संसद में खुली चर्चा जरूरी है. नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें इस मुद्दे पर बोलने का पूरा अधिकार है, लेकिन जानबूझकर इसे दबाया जा रहा है. इससे गंभीर आशंका पैदा होती है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है. उन्होंने स्पीकर की संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाई कि वे सदन के निष्पक्ष संरक्षक हैं और हर सदस्य, खासकर विपक्ष के बोलने के मौलिक अधिकार की रक्षा करनी चाहिए.

इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया 
कांग्रेस नेता ने इसे अभूतपूर्व स्थिति करार दिया और कहा कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के दबाव में स्पीकर को नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रपति अभिभाषण चर्चा में बोलने से रोकना पड़ा. यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है और वे इसका कड़ा विरोध दर्ज करते हैं. राहुल गांधी ने मांग की कि स्पीकर इस अन्याय को सुधारें और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दें.

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