चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला. करीब 59 साल बाद कांग्रेस एक बार फिर राज्य सरकार का हिस्सा बनने जा रही है. मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार के आगामी कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा. कांग्रेस नेतृत्व ने घोषणा की है कि एडवोकेट एस. राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन गुरुवार सुबह राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेंगे.
इस फैसले की जानकारी कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की. उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया. पार्टी के अनुसार, 1967 के बाद पहली बार तमिलनाडु में कांग्रेस सीधे सरकार का हिस्सा बनने जा रही है.
एस. राजेश कुमार कन्याकुमारी जिले के किल्लियूर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि पी. विश्वनाथन मदुरै जिले की मेलूर सीट से विधायक हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने दोनों नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने को मंजूरी दी है.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दोनों मंत्री जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे और पार्टी के जनकल्याणकारी एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए दोनों विधायकों को बधाई दी.
हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले DMK के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था और पांच सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए. मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को विधानसभा में बहुमत के लिए सहयोगियों की जरूरत पड़ी, जिसके बाद कांग्रेस ने DMK से दूरी बनाकर विजय सरकार को समर्थन देने का फैसला किया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ. दरअसल, कांग्रेस लंबे समय से तमिलनाडु की सत्ता में हिस्सेदारी चाहती थी. वहीं DMK नेतृत्व गठबंधन सरकार या सत्ता साझा करने के पक्ष में नहीं था. इसी वजह से दोनों दलों के रिश्तों में धीरे-धीरे तनाव बढ़ता गया.
विजय ने राजनीति में आने के बाद से ही सहयोगी दलों को उचित भागीदारी देने की बात कही थी. उनकी इसी रणनीति के तहत अब कांग्रेस को कैबिनेट में जगह मिल रही है. बताया जा रहा है कि आने वाले समय में VCK और IUML जैसे सहयोगी दलों के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.
तमिलनाडु में कांग्रेस की यह वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राज्य में 1952 से 1967 तक कांग्रेस की सरकार रही थी. उस दौर में सी. राजगोपालाचारी, के. कामराज और एम. भक्तवत्सलम जैसे दिग्गज नेताओं ने राज्य की सत्ता संभाली थी. लेकिन 1967 में DMK के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस कभी सरकार में शामिल नहीं हो पाई.
अब करीब छह दशक बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी को तमिलनाडु की राजनीति में नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है. गुरुवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह राज्य की गठबंधन राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है. First Updated : Wednesday, 20 May 2026