भारत को जल्द ही रूस से एक अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत मिलने वाला है, जिसे "आईएनएस तमाल" के नाम से भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा. यह युद्धपोत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस एक बहु-भूमिका वाला फ्रिगेट है, जो पिछले साल कमीशन किए गए आईएनएस तुशील की तर्ज पर बनाया गया है. 3,900 टन वजनी इस जहाज को रूस के कैलिनिनग्राद शिपयार्ड में अंतिम परीक्षणों के बाद एक या दो महीनों के भीतर भारत को सौंप दिया जाएगा.
यह फ्रिगेट चार क्रिवाक-III श्रेणी के युद्धपोतों में से एक है, जिनके लिए भारत ने अक्टूबर 2016 में रूस के साथ एक अम्ब्रेला समझौता किया था. इस समझौते के तहत पहले दो फ्रिगेट रूस से सीधे आयात किए जाने थे, जिनकी कुल लागत लगभग 8,000 करोड़ रुपये है. जबकि अन्य दो — त्रिपुट और तवस्या — गोवा शिपयार्ड में तकनीक हस्तांतरण के तहत बनाए जा रहे हैं, जिनकी अनुमानित लागत करीब 13,000 करोड़ रुपये है. पहला फ्रिगेट, आईएनएस तुशील, पहले ही 14 फरवरी को रूस से भारत के कारवार बंदरगाह पर पहुंच चुका है.
INS तमाल जैसे युद्धपोत भारत की नौसेना को हवा, सतह, पानी के नीचे और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्रों में एक साथ संचालन की क्षमता प्रदान करते हैं. यह जहाज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस होगा, जिसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 450 किलोमीटर तक कर दी गई है. इसके अलावा यह पोत एंटी-सबमरीन और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग हेलीकॉप्टर जैसे कामोव-28 और कामोव-31 को भी ले जाने में सक्षम है.
इस बीच, भारत ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में भी एक और उपलब्धि हासिल की है. नौसेना और डीआरडीओ ने संयुक्त रूप से स्वदेशी मल्टी-इंफ्लूएंस ग्राउंड माइन का सफल परीक्षण किया है. यह अंडरवाटर हथियार कम विस्फोटक क्षमता के बावजूद दुश्मन की पनडुब्बियों और स्टील्थ जहाजों को नष्ट करने की शक्ति रखता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर कहा कि यह प्रणाली भारतीय नौसेना की अंडरवाटर युद्धक क्षमता को और मजबूत करेगी.
पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और समुद्री सीमाओं पर संभावित खतरे को देखते हुए, भारत अपने नौसैनिक बेड़े को लगातार आधुनिक और घातक बना रहा है. INS तमाल के शामिल होने से भारत की समुद्री रणनीतिक शक्ति को और मजबूती मिलेगी. First Updated : Tuesday, 06 May 2025