पाकिस्तान में 7 साल मुसलमान बनकर रहे अजीत डोभाल, लेकिन जब मौलाना ने पहचान लिया हिंदू... क्या है पूरा किस्सा?

अजीत डोभाल, जो पाकिस्तान में 7 साल तक अंडरकवर जासूस के रूप में कार्य कर चुके हैं. उन्होंने अपनी पहचान को बचाने के लिए चतुराई से काम लिया.

Simran Sachdeva

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत कुमार डोभाल भारतीय खुफिया व्यवस्था का वो नाम हैं, जिनकी बहादुरी और रणनीतिक कौशल की मिसाल दी जाती है. लेकिन उनके जीवन का एक ऐसा अध्याय भी है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. ये किस्सा तब का है जब अजीत डोभाल पाकिस्तान में आईबी के अंडरकवर एजेंट के तौर पर कार्य कर रहे थे और एक बार उनकी पहचान खतरे में पड़ गई थी. 

अजीत डोभाल ने खुद एक कार्यक्रम में इस घटना का जिक्र किया था, जो ना केवल उनके अदम्य साहस को दर्शाता है, बल्कि बताता है कि कैसे उन्होंने अपनी सूझबूझ और चतुराई से पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश में 7 साल तक रहकर जासूसी की.

पाकिस्तान में 7 साल अंडरकवर रहे अजीत डोभाल

अजीत डोभाल भारतीय पुलिस सेवा के केरल कैडर के अधिकारी रहे हैं. उन्होंने खुफिया ब्यूरो (IB) में लंबे समय तक काम किया और 2004-2005 में इसके निदेशक बने. इससे पहले, उन्होंने 1 साल तक पाकिस्तान में मुसलमान बनकर आईबी के अंडरकवर एजेंट के रूप में सेवा दी. इसके बाद इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में 6 सालों तक अधिकारी के रूप में तैनात रहे.

जब मस्जिद के मौलाना ने डोभाल की पहचान की

अजीत डोभाल ने कार्यक्रम में बताया कि एक बार वो लाहौर की एक बड़ी मस्जिद के पास से गुजर रहे थे. तभी एक मौलाना ने उन्हें देख लिया और पूछा- तुम हिंदू हो? इस सवाल से वो चौंक तो गए, लेकिन तुरंत जवाब दिया- नहीं, मैं मुसलमान हूं.

मौलाना ने उन्हें दोबारा पास बुलाया और कहा कि तुम हिंदू हो. इस पर जब अजीत डोभाल ने कारण पूछा, तो मौलाना उन्हें मस्जिद के एक कमरे में ले गया. वहां उसने कहा कि तुम्हारे कान छिदे हुए हैं, इसीलिए मैंने पहचान लिया. तुम पकड़े गए.

मौलाना ने किया चौंकाने वाला खुलासा

इस मुश्किल स्थिति से निकलने के लिए अजीत डोभाल ने कहा कि उन्होंने बाद में धर्म परिवर्तन किया है. इस पर मौलाना ने कहा कि फिर कान की प्लास्टिक सर्जरी करा लो. लेकिन इसी बातचीत के दौरान मौलाना ने चौंकाने वाला खुलासा किया. उसने कहा कि मैं भी हिंदू हूं. मेरा पूरा परिवार मारा गया, इसलिए मुझे अपनी पहचान छुपाकर रहना पड़ा. इसके बाद मौलाना ने डोभाल को अपनी अलमारी खोलकर दुर्गा और शिव की मूर्तियां भी दिखाई और कहा कि मैं अब भी इनकी पूजा करता हूं.

सर्जरी कराई, फिर भी नहीं रुकी देशभक्ति

इस घटना के बाद अजीत डोभाल ने कान की प्लास्टिक सर्जरी करवाई ताकि उनकी असली पहचान दोबारा उजागर ना हो. लेकिन ये अनुभव भी उनकी देशसेवा की राह में रोड़ा नहीं बन सका. अजीत डोभाल आगे भी कई बड़े खुफिया अभियानों का हिस्सा बने. उन्होंने 1988 के ऑपरेशन ब्लैक थंडर, इराक में 46 भारतीयों की सुरक्षित निकासी, 2015 में म्यांमार में ऑपरेशन हॉट परस्यूट, पीएफआई के खिलाफ अभियान और कई अन्य मिशनों में अहम भूमिका निभाई है. उनकी रणनीति और साहस के कारण ही उन्हें 'मॉडर्न चाणक्य' कहा जाता है.

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