'अमेरिका तय करेगा भारत किससे तेल खरीदे?', संसद में राहुल गांधी का सरकार से तीखा सवाल
लोकसभा में राहुल गांधी ने मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वह किससे तेल खरीदे. अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद में केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश की विदेश नीति स्वतंत्र और मजबूत होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा नहीं दिख रहा है. उनका आरोप था कि देश की नीति किसी मजबूत रणनीति के बजाय बाहरी दबावों से प्रभावित हो रही है.
लोकसभा में व्यापारिक संप्रभुता और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति देश के इतिहास, भूगोल और उसकी मूल विचारधारा से तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह नीति जनता की सामूहिक इच्छा से बननी चाहिए, न कि किसी बाहरी ताकत के दबाव में.
एक्स पर साझा की वीडियो
राहुल गांधी ने अपने बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया. इसमें उन्होंने कहा कि भारत को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वह किस देश से तेल खरीदेगा. उनका कहना था कि अगर अमेरिका यह तय करे कि भारत रूस या ईरान से तेल खरीद सकता है या नहीं, तो यह देश की स्वतंत्र नीति पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए उन्हें “समझौतावादी” बताया और कहा कि ऐसी स्थिति में भारत की संप्रभुता प्रभावित होती है.
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह समझना जरूरी है कि भारत कब तक अमेरिकी दबाव या ब्लैकमेल जैसी स्थिति का सामना करता रहेगा. उनके बयान में अमेरिकी नीति और भारत के साथ उसके संबंधों को लेकर चिंता जताई गई.
अमेरिका ने दी रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट
दरअसल यह विवाद उस समय सामने आया जब अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट देने की घोषणा की. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी सरकार ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए लगभग 30 दिनों की छूट दी है.
उनका कहना था कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनी रहे और ऊर्जा संकट से बचा जा सके. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाएगा. अमेरिका भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की बात कर रहा है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि मध्य पूर्व में हाल ही में तनाव काफी बढ़ गया है. फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद क्षेत्र की स्थिति और संवेदनशील हो गई. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आई थीं.
इसके बाद क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है. देश के कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से आता है. इनमें से काफी मात्रा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत तक पहुंचती है.
रूस भी बढ़ा सकता है तेल आपूर्ति
इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह संभावित आपूर्ति संकट की स्थिति में भारत की मदद कर सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार रूस भारत की ओर अतिरिक्त कच्चे तेल की खेप भेजने के लिए तैयार है. बताया जा रहा है कि करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल पहले ही भारतीय समुद्री क्षेत्र के करीब पहुंच चुका है और आने वाले हफ्तों में यह भारत पहुंच सकता है.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, अमेरिका की नीतियों और रूस के साथ व्यापार को लेकर भारत में ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति पर नई बहस शुरू हो गई है. विपक्ष सरकार की रणनीति पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार वैश्विक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है.


