भाषा विवाद के बीच मोहन भगवत ने कहा- 'घर में मातृभाषा का प्रयोग जरूरी'

आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने भाषा, जाति और धन से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और सभी भाषाओं को समान सम्मान देने की अपील की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भगवत ने बुधवार को देश में सामाजिक एकता और आपसी सम्मान पर जोर देते हुए लोगों से भाषा, जाति और आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न करने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और सभी नागरिकों को मतभेदों से ऊपर उठकर सद्भाव के साथ रहना चाहिए. 

मातृभाषा पर क्या बोले भागवत?

भगवत ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने घर में अपनी मातृभाषा का प्रयोग करना चाहिए और सभी भाषाओं का समान महत्व है. मोहन भगवत की यह टिप्पणी ऐसे समय पर सामने आई है, जब दक्षिण भारत की कई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार पर हिंदी को बढ़ावा देने और अन्य भाषाओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं. इसके अलावा, देहरादून में कथित नस्लीय दुर्व्यवहार के बाद त्रिपुरा की छात्रा एंजेल चकमा की हत्या को लेकर देश के कई हिस्सों में नाराजगी देखी जा रही है. मोहन भगवत ने कहा कि भारत सभी का देश है और सामाजिक सौहार्द इसकी पहचान की नींव है.

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सोनपाईरी गांव में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे राज्य में रहता है, तो उसे वहां की स्थानीय भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए. उनके अनुसार, भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय महत्व की हैं और किसी एक को दूसरे से श्रेष्ठ नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि भाषाई विविधता भारत को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत बनाती है.

भाजपा नेताओं ने किया आरएसएस प्रमुख के बयान का समर्थन

भाजपा नेताओं ने आरएसएस प्रमुख के इस बयान का समर्थन किया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि मोहन भगवत का संदेश भारतीय पहचान के समावेशी स्वरूप को सामने रखता है. भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भारत में रहने वाला हर वह व्यक्ति, जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानता है, भारतीय है, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भी भगवत के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि वे लगातार समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात करते रहे हैं. शिवसेना नेता शायना एनसी ने भी भारत को सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक बताया.

हालांकि, विपक्ष ने इन बयानों को लेकर सवाल उठाए हैं. आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि मोहन भगवत किन विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी बातों से प्रेरणा लेने वाली राजनीतिक ताकतें कौन सी हैं. उन्होंने उत्तराखंड में त्रिपुरा की छात्रा से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाओं पर संघ प्रमुख की चुप्पी चिंताजनक है. वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि केवल बयान देने से बदलाव नहीं आएगा और आरएसएस प्रमुख को भाजपा नेताओं को हिंदी को जबरन थोपने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

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