साल के आखिरी महीने में सरकार की भरी तिजोरी, दिसंबर में 1.75 लाख करोड़ रहा जीएसटी कलेक्शन, 2024 की तुलना में 6.1 फीसदी ज्यादा

दिसंबर में जीएसटी संग्रह बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल से 6.1% अधिक है. यह आर्थिक गतिविधियों में तेजी, बेहतर टैक्स अनुपालन और सरकार की नीतियों के सकारात्मक असर को दर्शाता है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत देते हुए दिसंबर महीने में वस्तु एवं सेवा कर (GST) के संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में कुल जीएसटी कलेक्शन 1.75 लाख करोड़ रुपये रहा. यह आंकड़ा पिछले साल दिसंबर में हुए 1.65 लाख करोड़ रुपये के संग्रह की तुलना में 6.1 प्रतिशत अधिक है.

पिछले साल से कितना बढ़ा कलेक्शन?

यदि दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 की तुलना की जाए, तो साफ तौर पर कर संग्रह में सुधार नजर आता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों में तेजी, बेहतर टैक्स अनुपालन और खपत में सुधार का संकेत देती है. त्योहारी सीजन के बाद भी जीएसटी कलेक्शन का मजबूत रहना सरकार के लिए राहत की बात है.

आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत

दिसंबर में जीएसटी संग्रह का बढ़ना इस बात की ओर इशारा करता है कि उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र में गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं. खासकर मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और सर्विस सेक्टर से टैक्स कलेक्शन में अच्छी हिस्सेदारी देखने को मिली है. यह दर्शाता है कि बाजार में मांग बनी हुई है और लोग खर्च कर रहे हैं.

सरकार की नीतियों का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार द्वारा टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने का असर जीएसटी संग्रह पर साफ दिखाई दे रहा है. ई-इनवॉयसिंग, ऑनलाइन फाइलिंग और सख्त निगरानी से टैक्स चोरी में कमी आई है, जिससे राजस्व बढ़ा है.

राज्यों और केंद्र के लिए राहत

जीएसटी कलेक्शन में वृद्धि से केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को फायदा होता है. इससे राज्यों को विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो पाते हैं. वहीं केंद्र सरकार के लिए यह वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने में सहायक साबित होता है.

आने वाले महीनों को लेकर उम्मीदें

आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि यही रुझान आगे भी बना रहता है, तो आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह और बेहतर हो सकता है. उद्योगों में उत्पादन बढ़ने, सेवाओं की मांग में इजाफा होने और उपभोक्ता खर्च में सुधार से कर संग्रह को और मजबूती मिलने की संभावना है.

चुनौतियां अभी भी बरकरार

हालांकि जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई और ब्याज दरों जैसे कारकों पर नजर बनाए रखना जरूरी है. इनका असर घरेलू मांग और व्यापार पर पड़ सकता है.

अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

कुल मिलाकर, दिसंबर महीने में 1.75 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है. यह न सिर्फ सरकार के राजस्व की स्थिति को बेहतर बनाता है, बल्कि निवेशकों और बाजार के लिए भी भरोसे का संकेत देता है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह रफ्तार कितनी देर तक बनी रहती है.

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