'जंग के बीच PM मोदी का बड़ा संदेश', होर्मुज में रुकावट बर्दाश्त नहीं!

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संकट को गंभीर बताते हुए भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के प्रयासों पर जोर दिया. उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट को अस्वीकार्य बताते हुए कूटनीति के जरिए तनाव कम करने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की बात कही.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान से जुड़ी स्थिति पर विस्तृत बयान देते हुए इसे गंभीर और चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. इसलिए उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. 

पीएम ने राजनीतिक सहमति की आवश्यकता पर दिया जोर 

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि हालात को देखते हुए उन्होंने कई देशों के नेताओं से सीधे संवाद किया है और भारतीय मिशन प्रभावित इलाकों में फंसे नागरिकों की हरसंभव मदद में जुटे हुए हैं.

प्रधानमंत्री के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है. ईरान से भी करीब 1,000 नागरिकों की वापसी हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे भी राहत और बचाव अभियान तेज किए जाएंगे.

ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर बोलते हुए पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि यह जलमार्ग भारत सहित कई देशों के लिए कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है. मौजूदा तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन भारत ने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए यह सुनिश्चित किया है कि जरूरी आपूर्ति बाधित न हो. कुछ भारतीय जहाज जो इस क्षेत्र में फंसे थे, उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर क्या बोले पीएम? 

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की. साथ ही नागरिकों, ऊर्जा ढांचे और परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और कूटनीति का समर्थक रहा है और वर्तमान संकट में भी यही रास्ता सबसे कारगर है.

एलपीजी आपूर्ति को लेकर उन्होंने बताया कि भारत अपनी लगभग 60% जरूरत आयात से पूरी करता है. ऐसे में अनिश्चित हालात के बीच घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं, ताकि आम लोगों पर असर कम से कम पड़े.

अंत में प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि इस संघर्ष के दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं. इसलिए देश को एकजुट रहना होगा. उन्होंने कहा कि कुछ तत्व अफवाहें फैलाकर स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन सरकार और जनता को मिलकर ऐसे प्रयासों को विफल करना होगा.

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