तमिलनाडु चुनाव के मद्देनजर NDA ने की सीट बंटवारे समझौते की घोषणा, भाजपा को 27 सीटें और पीएमके को 18 सीटें आवंटित
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए ने सीट बंटवारे पर सहमति बना ली, जिसमें एआईएडीएमके ने सबसे ज्यादा सीटें अपने पास रखीं. भाजपा को 27, पीएमके को 18 और एएमएमके को 11 सीटें मिलीं, जबकि गठबंधन ने मजबूत रणनीति के साथ चुनावी तैयारी तेज कर दी है.

तमिलनाडु में होने वाले 234 सदस्यीय विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सोमवार को सीटों के बंटवारे पर सहमति बना ली. यह समझौता गठबंधन की प्रमुख सहयोगी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के नेतृत्व में अंतिम रूप दिया गया.
बैठक में कौन-कौन मौजूद रहा?
समझौते के दौरान एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से केंद्रीय मंत्री एवं चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल मौजूद रहे, जिन्होंने आधिकारिक तौर पर इस समझौते को आकार दिया. चेन्नई स्थित एआईएडीएमके मुख्यालय में हुए इस कार्यक्रम में गठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं की भी भागीदारी रही. भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेंथ्रान, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के प्रमुख अंबुमणि रामदास और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के महासचिव टीटीवी दिनाकरन भी इस मौके पर उपस्थित थे. इस बैठक को गठबंधन की चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सीटों के बंटवारे के तहत भाजपा को 27 सीटें दी गई हैं, जो पिछले 2021 विधानसभा चुनाव की तुलना में सात सीट अधिक हैं. वहीं, पीएमके को 18 सीटें और एएमएमके को 11 सीटों पर चुनाव लड़ने का अवसर मिला है. गठबंधन की अगुआई कर रही एआईएडीएमके ने स्वाभाविक रूप से सबसे अधिक सीटें अपने पास रखी हैं, जिससे उसकी चुनावी भूमिका केंद्रीय बनी रहेगी.
गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में एआईएडीएमके ने 179 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से उसे 66 सीटों पर जीत मिली थी. इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व इस बार भी अधिकतम सीटों पर चुनाव लड़ने के पक्ष में रहा. पार्टी का मानना है कि वह राज्य में अपने दम पर बहुमत हासिल करने की क्षमता रखती है. इसलिए उसने सीटों के बंटवारे में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने पर जोर दिया.
एआईएडीएमके का लक्ष्य क्या है?
सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके का लक्ष्य इस बार बेहतर प्रदर्शन कर सत्ता में वापसी करना है. इसी रणनीति के तहत पार्टी ने सहयोगियों को संतुलित तरीके से सीटें देते हुए खुद को चुनावी मुकाबले में मजबूत स्थिति में बनाए रखने की कोशिश की है. गठबंधन के इस समझौते के बाद तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में चुनावी प्रचार और भी तेज होने की संभावना है.


