ईरान की बड़ी चेतावनी, समुद्र के नीचे बारूदी जाल बिछाकर खाड़ी बंद करने की धमकी से बढ़ा वैश्विक तनाव
ईरान ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। कहा है कि हमला हुआ तो फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाकर सभी समुद्री रास्ते बंद कर दिए जाएंगे।

ईरान ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है। उसने कहा है कि अगर उसके तटीय इलाकों पर हमला हुआ तो जवाब कड़ा होगा। यह जवाब समुद्र के नीचे से दिया जाएगा। फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाई जाएंगी। इससे सभी समुद्री रास्ते बंद हो सकते हैं। यह बयान ईरान की रक्षा परिषद की ओर से आया है। इससे साफ है कि तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होगा?
ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज से गुजरना आसान नहीं रहेगा। गैर-युद्धरत देशों को भी समन्वय करना होगा। बिना अनुमति रास्ता नहीं मिलेगा। अगर हमला हुआ तो पूरा इलाका बंद किया जा सकता है। इससे वैश्विक शिपिंग पर बड़ा असर पड़ेगा। यह रास्ता दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां किसी भी रुकावट का असर सीधे तेल बाजार पर पड़ता है।
क्या बयान में और क्या कहा गया?
ईरान ने कहा है कि अगर हमला हुआ तो जिम्मेदारी हमलावर की होगी। पूरे क्षेत्र को बारूदी सुरंगों से भर दिया जाएगा। संचार और समुद्री रास्ते ठप हो जाएंगे। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब पहले भी इसी तरह के संकेत दिए जा चुके हैं। इससे साफ है कि ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। वह पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा।
क्या अमेरिका की प्रतिक्रिया सख्त है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर रास्ता नहीं खुला तो कार्रवाई होगी। यहां तक कि बिजली संयंत्रों पर हमला करने की बात भी कही गई है। इससे दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ गया है। हालात अब सीधे संघर्ष की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं।
क्या ब्रिटेन और अमेरिका में चर्चा हुई?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने होर्मुज संकट पर चर्चा की। उनका कहना है कि इस रास्ते को खुला रखना जरूरी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार इससे जुड़ा हुआ है। दोनों देश जल्द फिर बात करने वाले हैं। यह दिखाता है कि मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर हो चुका है।
क्या वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा?
इस संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज से गुजरने वाला यातायात काफी घट गया है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 95 प्रतिशत तक गिरावट आई है। कई जहाज इस रास्ते से बच रहे हैं। कंपनियां जोखिम नहीं लेना चाहतीं। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। तेल और गैस की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
क्या आगे हालात और बिगड़ेंगे?
स्थिति अभी बहुत नाजुक बनी हुई है। अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देश रास्ता खोलने की कोशिश में हैं। नाटो भी इस पर काम कर रहा है। लेकिन हालात कब सुधरेंगे, यह साफ नहीं है। अगर तनाव बढ़ा तो बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। पूरी दुनिया की नजर अब होर्मुज और फारस की खाड़ी पर टिकी है। आने वाले दिन बेहद अहम होंगे।


