पश्चिम बंगाल में बड़ा फैसला: ममता सरकार ने 76 नई जातियों को OBC लिस्ट में दी मंजूरी

ममता कैबिनेट ने ओबीसी सूची में 76 नई जातियों को शामिल करने के साथ मुर्शिदाबाद में फरक्का को नया सब डिविजन बनाने की मंजूरी दी. यह नया सब डिविजन शमशेरगंज, सुती-1 और सुती-2 ब्लॉकों को मिलाकर बनाया जाएगा, जो पहले जंगीपुर सब डिविजन का हिस्सा थे.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने एक के बाद एक अहम फैसलों की झड़ी लगा दी है, जिनका सीधा संबंध जनता से है. ताजा फैसलों में सबसे बड़ा नाम ओबीसी वर्ग से जुड़ा है.

राज्य कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (WBCBC) की सिफारिशों को मंजूरी देते हुए 76 नई जातियों को राज्य की ओबीसी सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है. अभी तक इस सूची में 64 जातीय समूह शामिल थे, जिनमें अब नई जातियों का समावेश होगा. माना जा रहा है कि यह फैसला खासतौर पर चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिससे बड़े सामाजिक वर्ग को साधा जा सके.

मुर्शिदाबाद में बना नया सब डिविजन

कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए मुर्शिदाबाद जिले में 'फरक्का' नाम से नया सब डिविजन बनाने की मंजूरी दे दी है. यह नया सब डिविजन शमशेरगंज, सुती-1 और सुती-2 ब्लॉकों को मिलाकर बनाया जाएगा. पहले ये ब्लॉक जंगीपुर सब डिविजन का हिस्सा थे.

अधिकारियों के अनुसार, जंगीपुर सब डिविजन में लगातार बढ़ती आबादी के चलते प्रशासनिक कामकाज में कठिनाई हो रही थी. इसी कारण, एक नया प्रशासनिक ब्लॉक बनाने की जरूरत महसूस की गई. इसके तहत कुल 109 नए अनुबंध-आधारित पदों का सृजन भी किया जाएगा.

ताजपुर डीप सी पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए नया टेंडर

कैबिनेट ने ताजपुर डीप सी पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया है. यह परियोजना करीब 25,000 करोड़ रुपये की है. गौरतलब है कि पहले इस प्रोजेक्ट का आशय पत्र अडानी पोर्ट्स को सौंपा गया था, जिसे राज्य सरकार ने 2023 में रद्द कर दिया था.

336 नए पदों के सृजन को भी हरी झंडी

कैबिनेट की बैठक में गृह, स्वास्थ्य, वित्त, विधि और नगर निगम मामलों के विभागों में 336 नए पदों के सृजन और रिक्तियों को भरने को भी मंजूरी दी गई. इससे सरकारी कामकाज को और मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इन सभी फैसलों से स्पष्ट है कि ममता सरकार प्रशासनिक स्तर पर जनता को साधने और राजनीतिक रूप से खुद को मजबूत करने के प्रयास में जुट गई है.

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