डिस्चार्ज से पहले ही मिलेगा बर्थ सर्टिफिकेट, अस्पतालों को सरकार का सख्त आदेश
आरजीआई ने सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल से छुट्टी से पहले ही उनके परिजनों को सौंप दिए जाएं. यह फैसला जन्म प्रमाण पत्र की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए लिया गया है, जिससे लोगों को दस्तावेज़ समय पर मिल सकें.

आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब देशभर के अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का बर्थ सर्टिफिकेट (जन्म प्रमाण पत्र) उनकी माताओं को अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही दे दिया जाएगा. इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) ने सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं.
रजिस्ट्रार कार्यालय ने कहा है कि विशेषकर वे अस्पताल, जहां देश के संस्थागत जन्मों का 50% से अधिक हिस्सा होता है, वहां यह प्रक्रिया अनिवार्य होनी चाहिए. अब जन्म के सात दिन के भीतर बर्थ सर्टिफिकेट जारी करना आवश्यक होगा. यह प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक या फिजिकल किसी भी रूप में दिया जा सकता है. इस कदम का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाओं में आसानी और पारदर्शिता प्रदान करना है.
बर्थ सर्टिफिकेट की बढ़ती मांग
RGI का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में बर्थ सर्टिफिकेट की उपयोगिता कई गुना बढ़ गई है. यह दस्तावेज सरकारी नौकरी, स्कूल- कॉलेज में दाखिले, पासपोर्ट बनवाने, विवाह पंजीकरण और कई अन्य कानूनी कार्यों के लिए अनिवार्य हो गया है.
RBD अधिनियम में संशोधन
यह प्रमाण पत्र RBD (Registration of Births and Deaths) अधिनियम, 1969 की धारा 12 के अंतर्गत जारी किया जाता है. वर्ष 2023 में इस अधिनियम में बड़ा संशोधन हुआ था. इस संशोधन के तहत बर्थ/डेथ सर्टिफिकेट के डेटा को अब सीधे नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR), राशन कार्ड, संपत्ति पंजीकरण, और मतदाता सूची जैसे दस्तावेज़ों में उपयोग किया जाएगा.
पहले ही किया गया था अलर्ट
मार्च 2025 में ही RGI ने निजी और सरकारी अस्पतालों को चेताया था कि वे 21 दिन के भीतर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य रूप से करें. रिपोर्ट्स मिली थीं कि कुछ अस्पताल इस दिशा में लापरवाही बरत रहे हैं. अब नए दिशा-निर्देशों के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जन्म प्रमाण पत्र समय पर जारी हो और लोगों को सरकारी योजनाओं व सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न हो.


