दिल्ली MCD में भाजपा की बड़ी जीत तय, राजा इकबाल सिंह बनेंगे अगला मेयर

दिल्ली एमसीडी में भाजपा की जीत तय मानी जा रही है। आम आदमी पार्टी ने मेयर चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा है, जिससे भाजपा के राजा इकबाल सिंह का मेयर बनना लगभग तय है. विपक्ष की भूमिका निभा चुके सिंह अब एमसीडी प्रशासन की कमान संभालने को तैयार हैं.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की सत्ता का समीकरण अब पूरी तरह भाजपा के पक्ष में झुक चुका है। इस बार मेयर की कुर्सी भाजपा के वरिष्ठ नेता और मौजूदा नेता विपक्ष राजा इकबाल सिंह के हिस्से में आना लगभग तय माना जा रहा है। 'आप' के पास पर्याप्त पार्षद संख्या न होने और पार्टी की ओर से मेयर पद के लिए उम्मीदवार न उतारने की घोषणा के बाद अब भाजपा की राह पूरी तरह साफ हो गई है.

राजा इकबाल सिंह का नाम पहले से ही एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभरकर सामने आ रहा था। अब जबकि आम आदमी पार्टी ने इस पद के लिए हाथ खींच लिया है, ऐसे में भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना महज औपचारिकता भर रह गया है.

MCD में बदला राजनीतिक समीकरण

दिल्ली एमसीडी चुनाव 2022 में 'आप' ने 134 पार्षदों के साथ जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा के 104 पार्षद निर्वाचित हुए थे। लेकिन समय के साथ समीकरण बदले और अब भाजपा के पास मेयर पद जीतने के लिए ज़रूरी समर्थन है, वहीं 'आप' के पास आंकड़े नहीं बचे. यही वजह है कि इस बार आम आदमी पार्टी ने मेयर चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा.

भाजपा ने घोषित किए अपने उम्मीदवार

भाजपा की ओर से राजा इकबाल सिंह को मेयर पद के लिए और नरेला जोन से पार्षद जय भगवान यादव को डिप्टी मेयर पद के लिए नामित किया गया है। दोनों नेता मंगलवार दोपहर 1 बजे निगम सचिवालय कार्यालय में नामांकन दाखिल करेंगे.

राजा इकबाल सिंह का राजनीतिक सफर

राजा इकबाल सिंह इससे पहले उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं. वर्तमान में वह एमसीडी में भाजपा के नेता विपक्ष हैं. उनकी राजनीतिक छवि साफ-सुथरी और अनुभव से भरपूर मानी जाती है। 51 वर्षीय सिंह ने श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी और बाद में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से एलएलबी की पढ़ाई की है.

विपक्ष की भूमिका से सत्ता तक

राजा इकबाल सिंह ने विपक्ष की भूमिका में रहते हुए एमसीडी में लगातार सत्तारूढ़ 'आप' पर सवाल उठाए और निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते रहे. अब जबकि भाजपा को मेयर पद मिलना तय है, ऐसे में उनके अनुभव का पूरा लाभ राजधानी के नगरीय प्रशासन को मिल सकता है.

आप ने क्यों छोड़ा मैदान?

'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी इस बार मेयर पद की दौड़ में नहीं रहेगी. इसके पीछे प्रमुख वजह यह है कि एमसीडी के मौजूदा समीकरणों में भाजपा का बहुमत दिख रहा है. 'आप' इस हार से बचने की रणनीति के तहत मुकाबले से हट गई.

अब भाजपा का ही बोलेगा इकबाल

राजा इकबाल सिंह का मेयर बनना अब लगभग तय है। पार्टी समर्थक और नेता इस फैसले से उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि सिंह के नेतृत्व में एमसीडी प्रशासन को नई दिशा मिलेगी और जनता को बेहतर नगरीय सेवाएं मिलेंगी.

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