IPO में तगड़े रिटर्न का लालच पड़ा भारी, रायपुर के कारोबारी से हुई 84 लाख की साइबर ठगी
रायपुर में शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश के नाम पर बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है. बता दें, ठगों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर एक कारोबारी और उसके परिचित निवेशकों से कुल 84 लाख 63 हजार रुपये ठग लिए.

रायपुर: रायपुर में शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश के नाम पर बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है. बता दें, ठगों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर एक कारोबारी और उसके परिचित निवेशकों से कुल 84 लाख 63 हजार रुपये ठग लिए. वहीं शिकायत मिलने के बाद देवेंद्र नगर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
आईपीओ में अच्छा रिटर्न दिलाने का दिया झांसा
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, देवेंद्र नगर निवासी अविनाश लोखंडे शेयर बाजार से संबंधित बिजनेस करते हैं. उन्होंने बताया वर्ष 2025 के दौरान कुछ लोगों ने उनसे व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया। इस दौरान आरोपियों ने खुद को निवेश विशेषज्ञ बताया और शेयर ट्रेडिंग तथा आईपीओ में कम समय में अच्छा रिटर्न दिलाने का दावा किया.
ऑनलाइन ट्रेडिंग से जोड़ा
शुरुआत में ठगों ने अविनाश को एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा और छोटी रकम का इन्वेस्टमेंट करने के लिए कहा. इस बीच शुरुआती निवेश में लाभ दिखाकर उन्होंने उनका विश्वास जीत लिया। इसके बाद आरोपियों ने विशेष श्रेणी के आईपीओ कम कीमत पर उपलब्ध कराने का झांसा दिया और अधिक धनराशि निवेश करने के लिए कहा.
अविनाश के साथ उनके कुछ परिचित निवेशकों ने भी इस प्रस्ताव पर भरोसा किया और आरोपियों के निर्देश पर सभी ने अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए. निवेशकों को उम्मीद थी कि उन्हें आईपीओ में बड़े स्तर पर शेयर और अच्छा मुनाफा मिलेगा। इसी लालच में निवेशकों ने कुल 84.63 लाख रुपये विभिन्न खातों में जमा करा दिए.
मोबाइल नंबर हुआ बंद
हालांकि, रकम जमा होने के बाद न तो किसी को आईपीओ का आवंटन मिला और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई. वहीं जब पीड़ितों ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके सभी मोबाइल नंबर बंद मिले। इसके अलावा जिस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश कराया जा रहा था, वह भी अचानक बंद हो गया.
पुलिस में शिकायत दर्ज
इस दौरान जैसे ही अविनाश को अपने साथ हुई ठगी का एहसास तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बता दें, कारोबारी की शिकायत के बाद पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन की जानकारी जुटाकर आरोपियों की पहचान करने में लगी हुई है. वहीं प्रारंभिक जांच में इस पूरे मामले को सोची-समझी साजिश माना जा रहा है.


