Coldrif Syrup Death Case: जंग लगे उपकरण, जहरीले केमिकल... 16 बच्चों की मौत के पीछे कफ सिरप फैक्ट्री की भयानक लापरवाही का खुलासा
Coldrif Syrup Death Case: मध्य प्रदेश के चिंदवाड़ा में 16 बच्चों की मौत का कारण बनी कफ सिरप कोल्ड्रिफ की फैक्ट्री में भयानक लापरवाही और अवैध रसायनों का इस्तेमाल हुआ. निरीक्षण में खुलासा हुआ कि फैक्ट्री में जंग लगी मशीनें, गंदगी और बिना परीक्षण के औद्योगिक रसायनों से सिरप बनाया गया, जबकि उत्पादन में कोई प्रशिक्षित रसायनज्ञ मौजूद नहीं था.

Coldrif Syrup Death Case: रासायनिक गड़बड़ी और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बनाए गए कोल्ड्रिफ कफ सिरप ने 16 बच्चों की जान ले ली. तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने मध्य प्रदेश फूड एंड ड्रग्स प्रशासन की चेतावनी के बाद 1 और 2 अक्टूबर को स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स फैक्ट्री पर छापा मारा. निरीक्षण में फैक्ट्री की घटिया स्थिति और गैर-कानूनी प्रथाओं का पता चला.
निरीक्षकों ने पाया कि प्लास्टिक की पाइपों से रासायनिक अवशेष टपक रहे थे, जंग लगी मशीनें और बिना सुरक्षा गियर वाले कर्मचारी औद्योगिक रसायनों को हाथों में मिलाते रहे. फैक्ट्री में कोई प्रशिक्षित रसायनज्ञ नहीं था और उत्पादन के दौरान किसी भी प्रकार के गुणवत्ता परीक्षण नहीं किए गए.
औद्योगिक केमिकल से बना कोल्ड्रिफ कफ सिरप
स्रोतों के अनुसार, कोल्ड्रिफ कफ सिरप के निर्माण में प्रयुक्त प्रोपलीन ग्लाइकॉल जैसे औद्योगिक रसायन स्थानीय वितरकों से नकद या गूगल पे के माध्यम से खरीदे गए. यह प्रक्रिया दस्तावेज़ीकरण से बचने के लिए की गई.
निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि फैक्ट्री ने औद्योगिक ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल किया, जिसमें डायएथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे घातक प्रदूषक की जांच नहीं की गई थी. डायएथिलीन ग्लाइकॉल, जो प्रिंटिंग इंक, गोंद, ब्रेक फ्लूड और स्नेहक बनाने में प्रयुक्त होता है, ने बच्चों की किडनी, लिवर और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचाया. जांच में पाया गया कि SR-13 बैच में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48.6 प्रतिशत थी, जो अनुमति सीमा से लगभग 500 गुना अधिक थी.
फैक्ट्री में सुरक्षा और गुणवत्ता की शून्य व्यवस्था
निरीक्षण के दौरान पता चला कि-
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कोई फार्माकोविजिलेंस सिस्टम नहीं था, यानी किसी ने भी दुष्प्रभाव या रीकॉल पर निगरानी नहीं रखी.
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उत्पादन के दौरान कोई प्रशिक्षित रसायनज्ञ मौजूद नहीं था.
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कच्चे माल की गुणवत्ता परीक्षण के बिना इस्तेमाल किया गया.
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पानी अज्ञात स्रोतों से लिया गया और शुद्धता की जांच नहीं हुई.
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फैक्ट्री में एयर हैंडलिंग यूनिट, HEPA फ़िल्टर, वेंटिलेशन, कीट नियंत्रण या सुरक्षा लॉग्स नहीं थे.
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निरीक्षण में 39 गंभीर और 325 प्रमुख उल्लंघन पाए गए, जिसमें कीट संक्रमण, खुले नाले, टूटे हुए उपकरण और एयर फिल्टर की कमी शामिल थी.
SR-13 बैच का भयंकर असर
SR-13 बैच, जिसे मई 2025 में बनाया गया था और अप्रैल 2027 तक वैध था, कई महीनों तक बिना किसी चेतावनी के बाजार में फ्रीली घूमता रहा. इस बैच के सेवन से चिंदवाड़ा में कई बच्चों में तीव्र किडनी फेलियर देखा गया. 16 बच्चों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश पांच साल से कम उम्र के थे.
अन्य सिरप जैसे Respolite D, GL, ST और Hepsandin का परीक्षण किया गया तो वे सामान्य गुणवत्ता के पाए गए.
निगरानी और जवाबदेही की कमी
जांच में पता चला कि यह हादसा केवल लापरवाही नहीं बल्कि प्रणालीगत विफलता का परिणाम था. तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल अथॉरिटी ने स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स की उत्पादन प्रक्रिया पर रोक लगा दी और सभी स्टॉक्स को फ्रीज़ कर दिया. कंपनी को शो-कार्न नोटिस जारी किया गया और लाइसेंस निलंबित कर दिया गया.
मध्य प्रदेश सरकार ने दो ड्रग इंस्पेक्टर और एक उप निदेशक को निलंबित किया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के ड्रग कंट्रोलर को ट्रांसफर कर दिया, जबकि चिंदवाड़ा के एक डॉक्टर को मेडिकल लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया.


