1 लाख नकली टैबलेट, 27 किलो पैरासिटामोल पाउडर...दिल्ली पुलिस ने बिहार से जब्त की नकली दवाओं की खेप, गिरफ्तार हुआ मास्टरमाइंड
बिहार के गया जी से दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पुलिस ने नकबली दवा बनाने वाली एक गिरोह की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. पुलिस द्वारा जब्त की गई दवाओं में 1.19 लाख नकली जिंक टैबलेट, 27 किलोग्राम पैरासिटामोल पाउडर एवं अन्य कई सामग्री जब्त किए है.

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस के विशेष दस्ते ने बिहार के गया में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का सफल भंडाफोड़ कर स्वास्थ्य क्षेत्र के बड़े खतरे को टाल दिया है. इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार 59 वर्षीय अरुण है, जो अपनी अवैध फैक्ट्री के माध्यम से देशभर में नकली गोलियां सप्लाई कर रहा था. यह गिरोह बिना किसी विशेषज्ञ के पेनकिलर और एंटीबायोटिक जैसी दवाएं तैयार कर रहा था. इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये के ड्रग कारोबार का पूरी तरह अंत हो गया है.
गया में अवैध तरीके से चल रहा था सिंडिकेट
आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गया में अवैध तरीके से चल रहे एक बहुत बड़े ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है. इस पूरे काले साम्राज्य का मुख्य सरगना 59 वर्षीय अरुण है, जो बिना किसी वैध सरकारी दस्तावेज के मौत का सामान तैयार कर रहा था. अब तक हुई छापेमारी में सिंडिकेट के कुल नौ सदस्यों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है. यह गिरोह न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी अपनी पैठ बना चुका था और संगठित अपराध का हिस्सा था.
भारी मात्रा में दवाओं की बरामदगी
पुलिस की इस सघन छापेमारी के दौरान दवाओं का ऐसा विशाल जखीरा मिला है जिसे देख सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह दंग रह गईं. मौके से करीब 1.19 लाख जिंक टैबलेट और 42,000 से अधिक नकली एजिथ्रोमाइसिन बरामद की गई हैं. इसके साथ ही 27 किलो पैरासिटामोल पाउडर और बड़ी संख्या में डिलोना एक्वा के एम्प्यूल भी जब्त किए गए हैं. बरामद किए गए कच्चे माल की मात्रा इतनी अधिक थी कि उससे कई महीनों तक नकली दवाएं बनाकर सप्लाई की जा सकती थीं.
करोड़ों के ट्रामाडोल का काला धंधा
इस गिरोह का सबसे खतरनाक पक्ष ट्रामाडोल पाउडर की अवैध तस्करी से जुड़ा हुआ था. मास्टरमाइंड अरुण ने लगभग 5 किलो से अधिक तस्करी किए गए ट्रामाडोल पाउडर को टैबलेट के रूप में बदल दिया था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कुल कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. इन खतरनाक टैबलेट्स को फर्जी मेडिकल स्टोरों के जरिए ऊंचे दामों पर साधारण पेनकिलर बताकर बेचा जाता था. यह सिंडिकेट चालाकी से इन नशीली दवाओं को युवाओं तक पहुंचा रहा था ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके.
अरुण की गिरफ्तारी बड़े ऑपरेशन का हिस्सा
अरुण की गिरफ्तारी पुलिस के एक निरंतर जारी रहने वाले बड़े ऑपरेशन का ही हिस्सा है. पिछले दिनों तनिष्क नाम के एक अन्य आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था, जिसने पुलिस की सख्ती के बाद अरुण के गुप्त ठिकाने और कारखाने का राज खोला. इससे पहले पटना में भी ऐसी ही एक फर्जी फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी थी. स्पेशल सेल की कई टीमें अब दिल्ली और बिहार के अन्य ठिकानों पर दबिश दे रही हैं ताकि इस सिंडिकेट के हर सदस्य को पकड़ा जा सके.
जनता की जिंदगी से खिलवाड़
जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध कारखाने में न तो कोई योग्य मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट था और न ही कोई लैब विशेषज्ञ. दवाओं की शुद्धता का वहां कोई पैमाना ही नहीं था. ये लोग केवल मोटा मुनाफा कमाने के लिए आम लोगों की मासूम जिंदगी के साथ जानलेवा खिलवाड़ कर रहे थे. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऐसी दवाएं किडनी और लीवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं. पुलिस अब उन फर्जी मेडिकल स्टोरों की लिस्ट तैयार कर रही है जो इनसे दवाएं खरीदते थे.


