'खून से होली...', पानी के गुब्बारे से शुरू, मौत तक पहुंचा विवाद, ईद से पहले क्यों उत्तम नगर छोड़ रहे मुसलमान?
दिल्ली के उत्तम नगर स्थित हस्तसाल गांव में तनाव का माहौल है. होली के दिन हुई दुखद घटना के बाद कई मुस्लिम परिवार डर के साए में जी रहे हैं. वे स्थिति सामान्य होने तक और ईद से पहले यहां से जाने की तैयारी में हैं. मीडिया से बातचीत में कई परिवारों ने अपनी मजबूरी और चिंता जाहिर की है.

दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान हुई हिंसा के बाद तनाव अब ईद तक पहुंच गया है. हस्तसाल गांव के कई मुस्लिम परिवार डर के साए में ईद से पहले इलाका छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि धार्मिक समूहों की ओर से मिल रही धमकियों ने माहौल को बेहद भयावह बना दिया है. मीडिया से बातचीत में स्थानीय निवासियों ने बताया कि 26 वर्षीय तरुण कुमार की मौत के बाद सोशल मीडिया और सड़कों पर भड़काऊ बयानबाजी बढ़ गई है, जिससे सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है.
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं और दोनों समुदायों के साथ बैठकें की जा रही हैं. डीसीपी ने लोगों से शांति बनाए रखने और इलाके में ही रहने की अपील की है, साथ ही भड़काऊ कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजे गए हैं.
होली पर क्या हुआ था?
4 मार्च को होली के दिन विवाद की शुरुआत तब हुई जब 11 साल की एक बच्ची ने पानी से भरा गुब्बारा फेंका, जो एक मुस्लिम महिला पर जा लगा. इससे दोनों परिवारों के बीच झगड़ा शुरू हो गया. मारपीट में 26 वर्षीय तरुण कुमार बुरी तरह घायल हो गए और चार दिन बाद उनकी मौत हो गई. पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो नाबालिगों को भी पकड़ा गया है. घटना के दो सप्ताह बाद भी दोनों समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है. सामाजिक और धार्मिक संगठन सक्रिय हैं, भड़काऊ बातें और धमकियां जारी हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर कैंपेन चल रहे हैं.
कौन दे रहा धमकियां?
मिया जी रेस्तरां के मालिक 55 वर्षीय जमील अहमद ने कहा कि वह और उनका परिवार करीब 50 साल से उत्तम नगर में रह रहा है. उन्होंने कहा, मेरे तीन बच्चे और 7 पोते-पोतियां हैं. हम डरे हुए हैं क्योंकि हमने नेताओं को कहते हुए सुना है कि वे 'खून की होली' खेलेंगे. हमारे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है.' अहमद ने आगे कहा, शोक मनाने और सांत्वना देने आए कुछ धार्मिक नेताओं ने हमें धमकियां दीं. हत्या सांप्रदायिक घटना नहीं है. उनका हमेशा से आपसी झगड़ा था. मुझे डर है कि हम सबको उनकी गलती का खामियाजा भुगतना होगा. हम शांति से रह रहे हैं, लेकिन बाहरी लोग धमकियां दे रहे हैं. हम वीडियो देखते हैं, जो बेहद डरावने हैं. हमारे बच्चे कहते हैं कि ईद के लिए हमें बाहर जाने की जरूरत है. दो परिवार जो हमारे घर के पास किराये पर रहते हैं, पहले ही जा चुके हैं.
पड़ोसी भी ठीक से नहीं कर रहे बात
हस्तसाल में ही रहने वाली 22 साल की फरजाना ने कहा, मैं यहां 20 साल से रह रही हूं, लेकिन यह बहुत हैरान करने वाला है कि आपके पड़ोसी आपसे ठीक से बात ना करें. हम जाना नहीं चाहते हैं लेकिन ईद हमारे लिए खास है और हम यहां नहीं रह सकते. हर दिन हिंसा और हमले की धमकियां दी जा रही हैं. हम हिंसा का समर्थन नहीं करते और हमारा इस केस से कोई लेनादेना नहीं. हम कुछ दिनों के लिए जाने की सोच रहे हैं.
हिंदुओं में भी डर
स्थानीय निवासी बिलाल राजपूत जो वकील हैं और जिनका परिवार यहां 1970 से रह रहा है, उन्होंने कहा, मेरे एक पड़ोसी जिन्हें हमारा परिवार 50 साल से जानता है, ने बताया कि उनके दो किरायेदार जा चुके हैं. मैं एक दुकानदार को जानता हूं जो जा चुका है. हम नहीं इलाका छोड़ने जा रहे हैं लेकिन हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि समस्या नहीं है. उन्होंने आगे कहा, 'मेट्रो स्टेशन के बाहर, पार्कों में और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. सभी जगह बैरिकेड्स लगे हुए हैं. एक अन्य पड़ोसी जो हिंदू है उसने मुझे सुरक्षित रहने को कहा क्योंकि वह डरा हुआ है. हम सभी डर में जी रहे हैं.
पुलिस दे रही सुरक्षा का भरोसा
दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्होंने पर्याप्त इंतजाम किए हैं और मीडिंग की जा रही हैं. डीसीपी कुशल पाल सिंह ने लोगों से इलाके में ही रहने की अपील की और त्योहार पर पर्याप्त सुरक्षा का भरोसा दिया. उन्होंने कहा, हमने एक्स और इंस्टाग्राम जैसे प्लैटफॉर्म्स को 22 अपीलें भेजीं और भड़काऊ वीडियो और भाषणों को हटाने के लिए कहा. मेटा ने पहले ही कई कॉटेंट हटा दिए हैं. हम उन क्रिएटर्स से भी संपर्क कर रहे हैं जिन्होंने ऐसा किया है. इनमें से अधिकतर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से हैं. कोई लोकल इसमें शामिल नहीं है. हमने दोनों समुदायों के साथ बैठकें की हैं और कोई हिंसा नहीं होगी.


